
कारगिल विजय दिवस पर वृद्धजनों हेतु ‘मुख एवं मानसिक स्वास्थ्य’ विशेष सत्र आयोजित

संवाददाता
रायबरेली।
कारगिल विजय दिवस के पावन अवसर पर सामाजिक संस्था ‘मेरा अपना आंगन’ एवं ‘स्नेहकांति चैरिटेबल ट्रस्ट’ के संयुक्त तत्वाधान में वृद्धजनों हेतु एक विशेष ‘ओरल एवं कॉग्निटिव हेल्थ’ (मुख एवं मानसिक स्वास्थ्य) सत्र का आयोजन रायबरेली में आई टी आई परिसर स्थित वृद्धजन आवास पर किया गया। सामाजिक संस्था ‘MAA मेरा अपना आँगन’ की संस्थापिका व अध्यक्ष प्रियंका पांडेय और ‘स्नेहकांति चैरिटेबल ट्रस्ट ‘ की संस्थापिका व अध्यक्ष स्नेहलता त्रिवेदी के साथ दोनों संस्थाओं के पदाधिकारियों ने कारगिल के वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित कर के नमन किया।
दांतों की देखभाल हेतु टूथब्रश और टूथपेस्ट का वितरण
सत्र में विशेषज्ञ के रूप में प्रसिद्ध दंत चिकित्सक डॉ. साक्षी वर्मा ने बुजुर्गों को उम्र बढ़ने के साथ दांतों और मसूड़ों की सही देखभाल करने के तरीके बताए। उन्होंने बताया कि खान-पान और दिनचर्या में किन-किन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर मुख के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखा जा सकता है। साथ ही डॉ साक्षी ने उपस्थित समस्त बुजुर्गों को अलग अलग निःशुल्क परामर्श भी प्रदान किया। इस अवसर पर डॉ. साक्षी की तरफ़ से उपस्थित सभी वरिष्ठ नागरिकों को मुलायम टूथब्रश का वितरण भी किया गया।
बुजुर्गों के जीवन में उम्मीद और मानसिक सक्रियता का संचार
कार्यक्रम में प्रसिद्ध विशेषज्ञ क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट विष्णु शरण ने बुजुर्गों से संवाद करते हुए उनके मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि उम्र के ऐसे पड़ाव पर, जहां शरीर की अवस्था के कारण केवल यह महसूस होने लगता है कि ईश्वर पास बुला ले और इस कष्टकारी शरीर से छुटकारा मिल जाए, वहीं जीने की इच्छा ही समाप्त होने लगती है।
ऐसे मौके पर उन्होंने बुजुर्गों को प्रेरित करते हुए बताया कि हम सभी के अंदर काफी खूबियां होती हैं। बुजुर्ग अपने इन अनुभवों, खूबियों और जीवन के मूल्यों को समाज के युवा साथियों और बच्चों के साथ साझा कर सकते हैं, जिससे युवाओं को और पूरे समाज को बहुत फायदा मिल सकता है। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों ने अपने जीवन में जो मूल्यवान कार्य किए हैं, उनका मूल्य आज भी बरकरार है इसे हमेशा याद रखना चाहिए ।
मानसिक सक्रियता को विशेष रूप से जरूरी बताते हुए क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट विष्णु शरण जी ने सलाह दी कि सुबह में टहलना काफी फायदेमंद रहता है। शारीरिक स्वास्थ्य के लिए जो भी संभव हो वह करना चाहिए और सांसों पर ध्यान देते हुए कुछ देर ध्यान (मेडिटेशन) लगाना मानसिक व अच्छी सेहत के लिए बेहद मददगार साबित होगा। साथ ही उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संस्थाएं किस प्रकार इस प्लानिंग के साथ काम करेंगी, इसकी रूपरेखा बनाना जरूरी है।
कार्यक्रम को सफल बनाने में दोनों संस्थाओं के सदस्यों की सराहनीय भूमिका रही। इस अवसर पर प्रमुख रूप से सक्रिय भूमिका में यासीन अहमद, राहुल मिश्रा, श्यामलाल, ऋषि सिन्हा, वी. के. त्रिवेदी और वरिष्ठ समाजसेवी महेंद्र अग्रवाल, प्रज्ञा त्रिपाठी, शशिप्रभा सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
Author: Vikas Srivastava









