
चौकी इंचार्ज पर लगे गंभीर आरोप, फ़िर सवालों के घेरे में खाकी

संवाददाता
रायबरेली।
प्रदेश में जहाँ एक तरफ़ योगी सरकार द्वारा जनता के हितों एवं उनकी सुरक्षा के दृष्टिगत पुलिस व्यवस्था को आधुनिक सुविधाओं से परिपूर्ण कर नागरिकों को सुरक्षित वातावरण देने का प्रयास किया जा रहा है वहीं जनपद में तैनात कुछ पुलिसकर्मियों की कार्यशैली से उत्तर प्रदेश पुलिस व सरकार पर कई बड़े सवाल खड़े होते रहते हैं।
ज्ञात हो कि जनपद के भदोखर थाना क्षेत्र अंतर्गत एक चौकी इंचार्ज पर मामले में रिश्वत लेने के लगातार दो प्रकरण प्रकाश में आए, जिनको लेकर शिकायतकर्ता ने पुलिस अधीक्षक से भेंट कर न्याय की गुहार लगाई है।भदोखर थाना क्षेत्र अंतर्गत मुंशीगंज बाजार निवासी मोहिनी उर्फ बिट्टो पुत्री स्व० बुद्ध लाल चौरसिया ने मुंशीगंज चौकी इंचार्ज अनुज तोमर समेत दो अन्य के विरुद्ध एक शिकायतीपत्र पुलिस अधीक्षक को सौंपा। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि “शादी के बाद से मेरा पति गगन चौरसिया पुत्र संतलाल चौरसिया, निवासी विजय बिहार दिल्ली, दहेज की मांग करता रहा। दहेज की मांग पूरी न होने पर आए दिन मुझे लात घूसा डण्डा से मार पीटकर प्रताड़ित करता रहा। मेरे मायके वाले जब मेरी खोज खबर लेने मेरी ससुराल दिल्ली आते तो पहरा बैठा दिया जाता था ताकि मैं उनसे प्रताड़ना की कोई बात न कह सकूं। बीते वर्ष मेरी मां के स्वर्गवास पर जब पति के साथ अपने मायके आयी, तो मैने सारी बात अपने मायके में अपने भाइयों से बताई और पति के साथ जाने से मना कर दिया तो मेरे पति के साथ आदर्श चौरसिया पुत्र देवबन्द चौरसिया नि० चक भीखमपुर थाना कोतवाली नगर, जिला रायबरेली, मेरी बेटी को जबरदस्ती साथ ले जाने हेतु छीना झपटी करने लगे। पुत्री को साथ में न भेजने पर बाद में मेरे भाईयों की गैर मौजूदगी में मुझे लाठी, डण्डा से मार पीट कर लहू लुहान कर दिया। जिस पर मैंने 1076 तथा 112 पर काल किया। मौके पर पुलिस आई और उक्त दोनों के ऊपर एफ०आई०आर० दर्ज की गयी।वर्तमान में यह मामला सिविल कोर्ट रायबरेली शासन बनाम गगन चौरसिया विचाराधीन है।”
शिकायतकर्ता ने बताया, “उक्त घटना के एक माह बाद पुनः मेरे मायके आकर मेरे भाईयों से मुझे दिल्ली भेजने को कहा। मेरे भाईयों के मना करने पर मुझे व मेरे भाई मनीष के साथ मारपीट की। पड़ोस के लोगों को आता देख वह लोग भाग गए और पुलिस में शिकायत कर दी।” शिकायतकर्ता ने चौकी इंचार्ज अनुज तोमर पर आरोप लगाते हुए बताया कि चौकी इंचार्ज अनुज तोमर दस बारह सिपाहियों के साथ मेरे मायके आए और दरवाजा तोड़कर मेरे भाई मनीष को मारपीट कर थाने ले गए और मेरे भाईयों के विरुद्ध गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर मेरे भाई मनीष को जेल भेज दिया। वर्तमान में मामला विचाराधीन है। उक्त घटना के बाद अब चौकी इंचार्ज एक दिन मेरे घर आया और मेरे भाईयों से कहा कि दो लाख रुपया दे दो तो अटेम्ट मर्डर की धारा एफ०आई०आर० से निकाल दूं। तब मेरे भाई ने चौकी इंचार्ज अनुज तोमर को 1,30,000/- उपरोक्त धारा एफ०आई०आर० से हटाने के लिए दिया किन्तु चौकी इंचार्ज द्वारा 1,30,000/- लेने के बावजूद उक्त धारा को नही हटाया है अब 70,000/- और माँग रहे हैं साथ ही सुलह करने को कह रहे हैं और ऐसा न करने पर संगीन धाराएं लगा कर पूरे परिवार को जेल भेजने की धमकी दे रहे हैं।”
फिलहाल शिकायतकर्ता ने पुलिस अधीक्षक को शिकायती पत्र देकर उक्त प्रकरण में उचित कार्यवाही की मांग की है और पुलिस अधीक्षक द्वारा जाँच का आश्वासन दिया गया है। हालांकि उक्त प्रकरण जांच का विषय है किन्तु एक ही चौकी इंचार्ज पर कार्यवाही के नाम पर रुपयों की मांग के लगातार दो प्रकरण प्रकाश में आने से समाज में पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े होते हैं। अब देखना यह होगा कि पुलिस अधीक्षक द्वारा उक्त प्रकरण में उचित कार्यवाही कर पीड़ितों को न्याय दिया जाएगा या फरियादी यूं ही दर दर भटकने को विवश होंगे?
Author: Vikas Srivastava









