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ज्ञान का मंदिर बना आरामगाह, कटनी के स्कूल में शिक्षकों की नींद ने उड़ाई शिक्षा की धज्जियां

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ज्ञान का मंदिर बना आरामगाह

कटनी के स्कूल में शिक्षकों की नींद ने उड़ाई शिक्षा की धज्जियां

 

हरि शंकर पाराशर 

कटनी।

शिक्षा, जिसे समाज का सबसे मजबूत स्तंभ माना जाता है, कटनी जिले के बहोरीबंद जनपद शिक्षा केंद्र के शासकीय ए.एल. राय हायर सेकेंडरी स्कूल, बचैया में उसकी पवित्रता को तार-तार कर दिया गया है। यहाँ सामने आईं तस्वीरें शिक्षा व्यवस्था की लापरवाही और शिक्षकों की उदासीनता की काली सच्चाई को उजागर करती हैं। जिस विद्यालय को ‘ज्ञान का मंदिर’ कहा जाता है, वहाँ शिक्षक कक्षा के समय गहरी नींद में सोते और मोबाइल स्क्रीन पर डूबे नजर आए। सबसे शर्मनाक बात यह रही कि प्राचार्य महोदय भी खर्राटों की दुनिया में खोए मिले। यह दृश्य न केवल शिक्षा की गरिमा को ठेस पहुँचाता है, बल्कि छात्रों के भविष्य के साथ क्रूर मजाक है।

 

सोए शिक्षक, टूटे छात्रों के सपने

हमारी संस्कृति में गुरु को भगवान का दर्जा दिया गया है, जो शिष्य के जीवन को दिशा देता है। लेकिन जब यही गुरु अपने कर्तव्य से मुँह मोड़कर नींद और मोबाइल को प्राथमिकता दे, तो यह बच्चों के भविष्य के साथ विश्वासघात है। बच्चे स्कूल इसलिए आते हैं ताकि उन्हें ज्ञान और मार्गदर्शन मिले, लेकिन जब शिक्षक ही बिस्तर बिछाकर सो जाएँ या मोबाइल में मशगूल हों, तो छात्रों की मेहनत और अभिभावकों की उम्मीदें धूल में मिल जाती हैं।

शिक्षा तंत्र की काली सच्चाई

यह घटना केवल एक स्कूल तक सीमित नहीं, बल्कि यह पूरे शिक्षा तंत्र की खोखली हकीकत को बेनकाब करती है। लाखों रुपये वेतन पाने वाले शिक्षक यदि पढ़ाने की बजाय आराम को चुनते हैं, तो यह करदाताओं के पैसे की खुली लूट है। ग्रामीण क्षेत्रों में अभिभावक अपनी मेहनत की कमाई बच्चों की पढ़ाई पर खर्च करते हैं, लेकिन जब स्कूल ही आरामगाह बन जाए, तो उनकी आशाएँ चकनाचूर हो जाती हैं। यही वजह है कि कई परिवार मजबूरी में महंगे निजी स्कूल का रुख करते हैं, जिससे सामाजिक असमानता और गहरा रही है।

जवाबदेही का अभाव

यह घटना शिक्षा विभाग में जवाबदेही के अभाव को भी उजागर करती है। जब प्राचार्य ही कक्षा के समय नींद में डूबे हों, तो बाकी शिक्षकों की लापरवाही पर सवाल उठना स्वाभाविक है। यह न केवल शिक्षा व्यवस्था की विफलता है, बल्कि उन बच्चों के भविष्य पर कुठाराघात है, जो बेहतर कल की उम्मीद में स्कूल की दहलीज पर कदम रखते हैं।

आवाज उठाने की जरूरत

कटनी के इस स्कूल की यह तस्वीर एक चेतावनी है कि शिक्षा तंत्र को सुधारने की तत्काल जरूरत है। जिम्मेदार अधिकारियों को इस लापरवाही पर सख्त कार्यवाही करनी होगी, ताकि शिक्षक अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें और विद्यालय फिर से ज्ञान का मंदिर बन सके। क्या हमारी शिक्षा व्यवस्था इतनी कमजोर हो चुकी है कि गुरु ही नींद में सो जाए और शिष्य भटकता रह जाए? यह सवाल हर उस व्यक्ति को झकझोरता है, जो शिक्षा को राष्ट्र की प्रगति का आधार मानता है।

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