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धार्मिक भावनाओं को लेकर मूक बने जिम्मेदार

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धार्मिक भावनाओं को लेकर मूक बने जिम्मेदार

 

रायबरेली।

 

आंध्र प्रदेश के तिरुपति मंदिर के प्रसाद में चर्बी की मिलावट पाए जाने से जहां लोगों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है वहीं दूसरी ओर इस मामले में सरकार द्वारा अब तक कोई ठोस कदम न उठाया जाना हिंदू धर्म की आस्था पर दोहरी चोट दे रहा है। जहां आम जनमानस का कहना है कि इस मामले की जांच होनी चाहिए और दोषियों को कड़ी से कड़ी सज़ा मिलनी चाहिए वहीं जब जिलाधिकारी रायबरेली से इस मामले में बात की गई तो उन्होंने कहा की मिलावट वहां पाई गई है हमारे यहां नहीं और ऐसा कोई शासनादेश नहीं है जिससे यहां जांच की जाए। खाद्य विभाग द्वारा सैंपल लिए गए हैं। 

अब सवाल यह उठता है कि कुछ दिनों बाद नवरात्र आरंभ हो रहे हैं उस पर जिम्मेदारों की यह कार्यशैली भक्तों को संशय में डाल रही है। पूजा पाठ व सभी धार्मिक अनुष्ठानों में देशी घी आदि का उपयोग किया जाता है। खाद्य विभाग द्वारा बताया गया कि सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे गए हैं जिसकी रिपोर्ट डेढ़ महीना बाद अर्थात नवरात्रि के बाद आयेगी। हालांकि इस मामले में किसी भी हिंदू संगठन ने अभी तक कोई आवाज नहीं उठाई है। अतः इन परिस्थितियों में संशय होना स्वाभाविक है कि बाजार में मिलने वाला घी आदि क्या पूजा पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों के योग्य है या नहीं?

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