
सूचना विभाग के सर्वे सर्वा बने अनुदेशक विकास
वर्षों से जिलाधिकारी कार्यालय में जमे सूचना अनुदेशक स्वयं को समझ रहे डीएम

रायबरेली।
जनपद के कलेक्ट्रेट परिसर स्थित जिलाधिकारी कार्यालय में तैनात एक सूचना अनुदेशक कदाचित स्वयं को जिलाधिकारी ही मान बैठा है। जिलाधिकारी से कौन मिलेगा, कक्ष में प्रवेश किसको मिलेगा यह सब कार्यालय में तैनात एक सूचना अनुदेशक के इशारे पर होता है।
ज्ञात हो कि जिलाधिकारी कार्यालय में सूचना अनुदेशक विकास विगत कई वर्षों से तैनात है जिसका कार्य जिलाधिकारी द्वारा किए गए शासकीय कार्यों की सूचना संकलित कर विभाग के माध्यम से पत्रकारों तक पहुंचाना है किन्तु इतने वर्षों से जिलाधिकारी कार्यालय में कार्यरत होने का नशा इस कदर सिर चढ़ गया कि कदाचित वह स्वयं को जिलाधिकारी ही समझने का भ्रम पाल बैठे हैं। जिलाधिकारी कक्ष में कौन प्रवेश करेगा, पत्रकारों हेतु बने सूचना विभाग के अधिकारिक ग्रुप में किसको जोड़ना है किसको निकालना है इन सब का निर्णय लेकर वह स्वयं को सर्वेसर्वा साबित करने में कोई कसर नही छोड़ रहे हैं। इतना ही नही बल्कि किसी मामले को लेकर पत्रकारों द्वारा जिलाधिकारी से बात करने हेतु जाने पर उनसे क्या काम है, क्या बात करनी है, क्या पूँछना है जैसे सवालों और उनसे अभद्रता पूर्वक बात करना यह स्पष्ट संकेत देता है कि वह अपने आप को ही सर्वेसर्वा समझ रहा है।
बताते चलें कि सूचना अनुदेशक विकास द्वारा शनिवार को एक प्रतिष्ठित समाचार पत्र के जिला संवाददाता को अकारण ही सूचना विभाग के ग्रुप से हटा दिया गया। पत्रकार द्वारा इस सम्बन्ध में जानकारी लेने हेतु उन्हें कई बार फोन किया गया किन्तु उनके द्वारा हर बार फोन काट दिया गया। जिसके बाद पत्रकार ने सूचना अधिकारी को फोन कर इस मामले की जानकारी ली गई तो सूचना अधिकारी ने बताया कि मुझे जानकारी नही है, मैं देखता हूं। इससे यह स्पष्ट होता है कि उक्त अनुदेशक द्वारा बिना उच्चाधिकारियों के निर्देश के ही मनमाने ढंग से ऐसा किया गया है। वहीं सूत्रों की मानें तो उक्त अनुदेशक द्वारा साठगांठ करके फरियादियों और अन्य लोगों को सहूलियत देने का कार्य किया जाता है।
Author: Vikas Srivastava










