
पुलिसकर्मी द्वारा बिना वजह मारपीट: BNS धारा 115 के तहत कड़ी सजा का प्रावधान

नई दिल्ली।
पुलिसकर्मियों द्वारा बिना उचित कारण के नागरिकों पर हाथ उठाना या मारपीट करना अब गंभीर अपराध की श्रेणी में शामिल हो गया है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 115 के तहत ऐसे कृत्यों को अपराध घोषित किया गया है, जिसमें दोषी पुलिसकर्मी को 1 साल तक की कैद या ₹10,000 तक का जुर्माना अथवा दोनों सजाएं एक साथ हो सकती हैं।
यह नया कानूनी प्रावधान पुलिस व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हाल के वर्षों में पुलिस द्वारा शक्ति के दुरुपयोग और आम नागरिकों के साथ दुर्व्यवहार की बढ़ती घटनाओं ने जनता के बीच आक्रोश को जन्म दिया था। इस पृष्ठभूमि में, BNS धारा 115 का लागू होना पुलिसकर्मियों को अपनी शक्तियों का विवेकपूर्ण उपयोग करने के लिए प्रेरित करेगा।
कानून का उद्देश्य और प्रभाव
कानून विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रावधान न केवल नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करता है, बल्कि पुलिस बल के भीतर अनुशासन को भी मजबूत करता है। दिल्ली के वरिष्ठ अधिवक्ता और कानून विशेषज्ञ डॉ. रमेश चंद्र शर्मा ने बताया, “पुलिसकर्मी कानून के रक्षक हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे कानून से ऊपर हैं। धारा 115 के तहत यह स्पष्ट किया गया है कि बिना उचित कारण के मारपीट या हिंसा अस्वीकार्य है। यह जनता और पुलिस के बीच विश्वास के रिश्ते को मजबूत करने में मदद करेगा।”
इसके अतिरिक्त, यह कानून पुलिस प्रशिक्षण और व्यवहार में सुधार की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है। कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस प्रावधान का स्वागत करते हुए कहा कि यह पुलिस सुधारों की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। सामाजिक कार्यकर्ता अनीता राव ने कहा, “पुलिसकर्मियों को यह समझना होगा कि उनकी वर्दी उन्हें अनुचित व्यवहार का अधिकार नहीं देती। यह कानून नागरिकों को सुरक्षा और सम्मान का भरोसा देता है।”
क्या कहते हैं आंकड़े?
हाल के अध्ययनों और शिकायतों के आधार पर, देश के विभिन्न हिस्सों में पुलिस द्वारा मारपीट या दुर्व्यवहार की घटनाएं सामने आती रही हैं। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में पुलिस की बर्बरता से संबंधित शिकायतों में 15% की वृद्धि दर्ज की गई है। इनमें से कई मामले बिना उचित कारण के थप्पड़ मारने, धमकाने या शारीरिक हिंसा से जुड़े हैं।
कानून के लागू होने के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इसका कार्यान्वयन कितना प्रभावी होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रावधान का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के लिए पुलिस विभागों में आंतरिक जांच तंत्र को और मजबूत करना होगा। साथ ही, नागरिकों को भी अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने की आवश्यकता है ताकि वे ऐसी घटनाओं की शिकायत बिना डर के दर्ज करा सकें।
नागरिकों के लिए सलाह
यदि कोई नागरिक पुलिसकर्मी द्वारा बिना वजह मारपीट या दुर्व्यवहार का शिकार होता है, तो वह नजदीकी पुलिस स्टेशन, मानवाधिकार आयोग या कोर्ट में शिकायत दर्ज कर सकता है। इसके अलावा 112 पर भी शिकायत की जा सकती है, कई गैर-सरकारी संगठन भी ऐसी घटनाओं में कानूनी सहायता प्रदान करते हैं। यह नया कानून न केवल पुलिस सुधारों की दिशा में एक कदम है, बल्कि यह समाज में न्याय और समानता के सिद्धांतों को भी मजबूत करता है। उम्मीद है कि यह प्रावधान पुलिस और जनता के बीच विश्वास के सेतु को और सुदृढ़ करेगा।
Author: Vikas Srivastava










