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डीआरआई की बड़ी कार्यवाही: ऑपरेशन क्रिस्टल ब्रेक में 92 करोड़ की मेफेड्रोन जब्त, 7 गिरफ्तार

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डीआरआई की बड़ी कार्यवाही: ऑपरेशन क्रिस्टल ब्रेक में 92 करोड़ की मेफेड्रोन जब्त, 7 गिरफ्तार

 

हरि शंकर पाराशर 

भोपाल।

राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक गुप्त मेफेड्रोन (एमडी) निर्माण फैक्ट्री का भंडाफोड़ कर नशीले पदार्थों के खिलाफ बड़ी कार्यवाही की है। इस ऑपरेशन, जिसे “ऑपरेशन क्रिस्टल ब्रेक” नाम दिया गया, में डीआरआई ने 61.2 किलोग्राम मेफेड्रोन (तरल रूप में) जब्त किया, जिसकी अंतर्राष्ट्रीय अवैध बाजार में कीमत लगभग 92 करोड़ रुपये आंकी गई है। इसके साथ ही, 541.53 किलोग्राम कच्चा माल और पूरी प्रोसेसिंग मशीनरी भी बरामद की गई। इस कार्यवाही में सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें एक प्रशिक्षित केमिस्ट, हवाला ऑपरेटर और सप्लाई चेन के प्रमुख सदस्य शामिल हैं।

ऑपरेशन क्रिस्टल ब्रेक: कार्यवाही का विवरण

डीआरआई ने विशेष खुफिया जानकारी के आधार पर 16 अगस्त 2025 को भोपाल के हुजूर तहसील के ग्राम जगदीशपुर (इस्लामनगर) में अवैध फैक्ट्री पर छापा मारा। यह फैक्ट्री एक सुनसान इलाके में बनाई गई थी और चारों तरफ से ढकी हुई थी ताकि किसी की नजर न पड़े। छापेमारी के दौरान, डीआरआई अधिकारियों ने दो व्यक्तियों को रंगे हाथों पकड़ा, जिनमें से एक केमिस्ट था, जो मेफेड्रोन के अवैध उत्पादन में लिप्त था। जब्त किए गए कच्चे माल में मेथिलीन डाइक्लोराइड, एसीटोन, मोनोमेथिलमाइन (एमएमए), हाइड्रोक्लोरिक एसिड (एचसीएल), और 2-ब्रोमो जैसे रसायन शामिल थे। इसके अलावा, मेफेड्रोन उत्पादन के लिए उपयोग की जाने वाली पूरी मशीनरी भी बरामद की गई।

मल्टी-स्टेट नेटवर्क का पर्दाफाश

यह कार्यवाही केवल भोपाल तक सीमित नहीं थी। डीआरआई ने मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और उत्तर प्रदेश में एक साथ छापेमारी की, जिसके परिणामस्वरूप इस अंतर्राष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट के सात प्रमुख सदस्यों को गिरफ्तार किया गया। इनमें से एक प्रमुख सदस्य, जो भिवंडी (महाराष्ट्र) से भोपाल तक कच्चे माल की आपूर्ति की देखरेख करता था, उसे उत्तर प्रदेश के बस्ती में गिरफ्तार किया गया। मुंबई में दो रासायनिक आपूर्तिकर्ताओं और एक ट्रांसपोर्टर को पकड़ा गया, जबकि सूरत में एक हवाला ऑपरेटर को हिरासत में लिया गया। प्रारंभिक जांच से पता चला कि यह नेटवर्क विदेशी सरगना के इशारे पर काम कर रहा था। सूत्रों के अनुसार, यह नेटवर्क तुर्की में रहने वाले सलीम डोला द्वारा संचालित किया जा रहा था, जिसके कथित तौर पर दाऊद इब्राहिम के नेटवर्क से संबंध हैं। सलीम डोला ने सूरत और मुंबई से हवाला चैनल के माध्यम से रसायनों की आपूर्ति और धनराशि का समन्वय किया। मार्च से जुलाई 2025 के बीच इस सिंडिकेट ने भोपाल इकाई में 400 किलोग्राम से अधिक कच्चा माल पहुंचाया था।

मेफेड्रोन: एक खतरनाक नशीला पदार्थ

मेफेड्रोन, जिसे आमतौर पर “म्याऊं म्याऊं” या “एमडी” के नाम से जाना जाता है, एक सिंथेटिक उत्तेजक दवा है, जिसका प्रभाव कोकीन और एम्फेटामाइन जैसा होता है। यह नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंसेज (एनडीपीएस) अधिनियम, 1985 के तहत प्रतिबंधित है। हाल के वर्षों में, विशेष रूप से युवाओं के बीच इसका दुरुपयोग बढ़ा है, जिसे सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा माना जा रहा है।

डीआरआई की सतत कार्यवाही 

यह डीआरआई द्वारा पिछले एक साल में छठी गुप्त मेफेड्रोन फैक्ट्री का भंडाफोड़ है। इससे पहले नागपुर और लातूर में भी इसी तरह की कार्यवाहियां की गई थीं। डीआरआई ने कहा कि वह अवैध ड्रग फैक्ट्रियों को खत्म करने और अंतर्राष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट्स और उनके मास्टरमाइंड तक पहुंचने के लिए प्रतिबद्ध है। इस ऑपरेशन में सूरत और मुंबई पुलिस ने भी महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया।

पिछले साल की बड़ी कार्यवाही

यह ध्यान देने योग्य है कि अक्टूबर 2024 में, गुजरात एटीएस और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने भोपाल के बागरोदा औद्योगिक क्षेत्र में एक अन्य ड्रग फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया था, जहां 907.09 किलोग्राम मेफेड्रोन और कच्चे माल को जब्त किया गया था, जिसकी कीमत 1,814 करोड़ रुपये थी। यह कार्यवाही भारत में अब तक की सबसे बड़ी मेफेड्रोन जब्ती थी।

भोपाल: नशीले पदार्थों का उभरता केंद्र?

लगातार दूसरी बड़ी कार्यवाही से यह चिंता बढ़ रही है कि भोपाल सिंथेटिक नशीले पदार्थों के उत्पादन और व्यापार का केंद्र बनता जा रहा है। डीआरआई और अन्य एजेंसियां अब इस नेटवर्क के अंतर्राष्ट्रीय संबंधों की गहन जांच कर रही हैं ताकि इसके पूरे तंत्र का पर्दाफाश किया जा सके।

“ऑपरेशन क्रिस्टल ब्रेक” न केवल डीआरआई की प्रभावी खुफिया और समन्वित कार्यवाही का प्रमाण है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि भारत में नशीले पदार्थों के खिलाफ लड़ाई कितनी जटिल और चुनौतीपूर्ण है। गिरफ्तार किए गए सभी सात आरोपियों ने अपने-अपने अपराध स्वीकार कर लिए हैं, और जांच अब इस नेटवर्क के अंतर्राष्ट्रीय कनेक्शन और अन्य संभावित ठिकानों पर केंद्रित है। डीआरआई ने स्पष्ट किया है कि वह नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार को जड़ से खत्म करने के लिए अपनी कार्यवाहियां जारी रखेगी।

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