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लोकायुक्त का सनसनीखेज छापा, पीडब्ल्यूडी के पूर्व चीफ इंजीनियर के घर से भ्रष्टाचार के सबूत बरामद

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लोकायुक्त का सनसनीखेज छापा

पीडब्ल्यूडी के पूर्व चीफ इंजीनियर के घर से भ्रष्टाचार के सबूत बरामद

मुंबई संपत्तियों का हुआ खुलासा

 

हरि शंकर पाराशर 

भोपाल। 

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी कार्यवाही देखने को मिली। लोकायुक्त की विशेष टीम ने गुरुवार सुबह लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के पूर्व चीफ इंजीनियर जेपी मेहरा के आलीशान आवास पर धावा बोल दिया। यह छापा भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों की जांच का हिस्सा है, जिसमें मेहरा पर अपने लंबे प्रशासनिक करियर के दौरान विभागीय ठेकों और निर्माण परियोजनाओं में लाखों-करोड़ों की अनियमितताएं करने का आरोप लगाया गया है। रिटायरमेंट के महज कुछ महीनों बाद ही मेहरा के घर पर पड़ी इस रेड ने न केवल भोपाल के नौकरशाही हलकों में हड़कंप मचा दिया है, बल्कि आम जनता में भी भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्ती की उम्मीद जगाई है।

छापे का पूरा कालानुक्रमिक घटनाक्रम

गुरुवार सुबह करीब 7 बजे लोकायुक्त की एक उच्चस्तरीय टीम, जिसमें अनुभवी जांच अधिकारी और पुलिसकर्मी शामिल थे, भोपाल के पॉश इलाके मणिपुरम स्थित मेहरा के बंगले पर पहुंची। घर के मुख्य द्वार पर ताला जड़ दिया गया और तलाशी अभियान शुरू हो गया। कार्यवाही गोपनीय सूचना के आधार पर अचानक की गई थी, जिससे मेहरा या उनके परिवार को कोई पूर्वानुमान न हो सके। जांच टीम ने घर के हर कोने की छानबीन की, जिसमें लॉकर, अलमारियां, कंप्यूटर और फाइल कैबिनेट्स शामिल थे। यह ऑपरेशन करीब 6 घंटे तक चला और दोपहर तक टीम घर से निकली।

प्रारंभिक रिपोर्ट्स के मुताबिक, छापे के दौरान बड़ी मात्रा में संदिग्ध दस्तावेज बरामद किए गए। इनमें पीडब्ल्यूडी के पुराने प्रोजेक्ट्स से जुड़े टेंडर फाइलें, संपत्ति खरीद-बिक्री के कागजात और विभिन्न केस फाइलें प्रमुख हैं। सबसे चौंकाने वाली खोज मुंबई में मेहरा द्वारा खरीदी गई लग्जरी संपत्तियों से संबंधित दस्तावेज थे। इनमें फ्लैट्स, प्लॉट्स और कमर्शियल प्रॉपर्टीज का जिक्र है, जिनकी वैल्यू करोड़ों में बताई जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि ये संपत्तियां मेहरा की ज्ञात आय से कहीं अधिक हैं, जो भ्रष्टाचार के आरोपों को और पुख्ता कर सकती हैं।

जेपी मेहरा: आरोपी की पृष्ठभूमि और लगे आरोप

जेपी मेहरा मध्य प्रदेश पीडब्ल्यूडी में चीफ इंजीनियर के पद पर रहते हुए कई बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की जिम्मेदारी संभाल चुके थे। सड़क निर्माण, पुल बनवाने और सरकारी भवनों के विकास जैसे कार्यों में उनकी भूमिका रही। इस साल की शुरुआत में रिटायर होने के बाद वे भोपाल में ही रह रहे थे। लेकिन रिटायरमेंट के बाद भी उनके खिलाफ कई शिकायतें लोकायुक्त के पास पहुंची थीं। मुख्य आरोप यह है कि मेहरा ने ठेकेदारों से रिश्वत लेकर फर्जी टेंडर पास किए, घटिया सामग्री के इस्तेमाल को हरी झंडी दी और प्रोजेक्ट्स की लागत को हवा में उड़ा दिया। एक अनुमान के मुताबिक, इन अनियमितताओं से राज्य को करोड़ों का नुकसान हुआ है।

मेहरा ने छापे के दौरान जांच टीम से कोई औपचारिक बयान नहीं दिया, लेकिन स्रोतों के अनुसार वे सदमे में थे। उनके परिवार ने भी चुप्पी साध रखी है। लोकायुक्त सूत्रों का कहना है कि मेहरा के बैंक खातों और अन्य संपत्तियों की भी जांच की जा रही है, जिसमें बेनामी प्रॉपर्टीज का पता लगाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों से सहयोग लिया जा सकता है।

जब्त सामान और जांच की दिशा

छापे में मिले दस्तावेजों में न केवल पीडब्ल्यूडी के आंतरिक रिकॉर्ड्स हैं, बल्कि मुंबई की रियल एस्टेट डील्स से जुड़े लीगल पेपर्स भी शामिल हैं। इन दस्तावेजों से पता चला है कि मेहरा ने 2018 से 2023 के बीच मुंबई के प्रमुख इलाकों में कई प्रॉपर्टीज खरीदीं, जिनकी कुल कीमत 5 करोड़ से अधिक हो सकती है। इसके अलावा, कुछ पुराने केस फाइलें भी बरामद हुईं, जो लंबित भ्रष्टाचार मामलों से जुड़ी हैं। नकद या गहनों का कोई उल्लेख नहीं है, लेकिन डिजिटल डेटा की फॉरेंसिक जांच जारी है।

लोकायुक्त के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा,”यह छापा भ्रष्टाचार के खिलाफ हमारी जीरो टॉलरेंस पॉलिसी का हिस्सा है। प्राप्त सामग्री से मामला मजबूत हो रहा है, और आगे की कार्यवाही में गिरफ्तारी या चार्जशीट का विकल्प खुला है।” हालांकि, आधिकारिक बयान में कहा गया कि जांच गोपनीय रखी जाएगी ताकि साक्ष्य सुरक्षित रहें।

व्यापक प्रभाव और जनता की प्रतिक्रिया

यह छापा मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही मुहिम का हिस्सा है, जहां हाल ही में कई बड़े अधिकारियों पर शिकंजा कसा गया है। पीडब्ल्यूडी जैसे विभागों में टेंडर सिस्टम की कमजोरियां लंबे समय से चर्चा का विषय रही हैं, और यह घटना इन्हें फिर से उजागर कर रही है। सोशल मीडिया पर लोग इसकी सराहना रहे हैं, लेकिन कुछ पूर्व अधिकारी इसे “राजनीतिक बदले” का रंग देने की कोशिश कर रहे हैं। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्यवाही बिना भेदभाव के जारी रहेगी।

लोकायुक्त की जांच अभी प्रारंभिक चरण में है, और अगले कुछ दिनों में और खुलासे हो सकते हैं। जेपी मेहरा पर औपचारिक एफआईआर दर्ज होने की संभावना है, जो उन्हें कोर्ट के सामने ला सकती है। यह मामला न केवल एक व्यक्ति की कहानी है, बल्कि पूरे सिस्टम में व्याप्त भ्रष्टाचार की गहरी पड़ताल का प्रतीक बन गया है।

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