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कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया चुनाव सम्पन्न 

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कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया चुनाव सम्पन्न 

राजीव प्रताप रूडी की शानदार जीत

संजीव बालियान को मिली हार
गुजरात लॉबी का प्रभाव रहा नाकाम

 

हरिशंकर पाराशर

नई दिल्ली।

दिल्ली के प्रतिष्ठित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया के सचिव पद के लिए हुए बहुप्रतीक्षित चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वरिष्ठ सांसद राजीव प्रताप रूडी ने एक बार फिर अपनी बादशाहत कायम रखी है। मंगलवार देर रात घोषित परिणामों के मुताबिक, रूडी ने अपनी ही पार्टी के पूर्व सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान को करीब 100 वोटों के अंतर से हराकर शानदार जीत दर्ज की। इस चुनाव में गुजरात लॉबी का प्रभाव नाकाम रहा, जिसके बारे में माना जा रहा था कि वह बालियान के पक्ष में सक्रिय थी। यह मुकाबला क्लब के इतिहास में सबसे रोमांचक और हाई-प्रोफाइल रहा, जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी जैसे दिग्गज नेताओं ने मतदान किया।

कांटे की टक्कर और रिकॉर्ड मतदान

कॉन्स्टिट्यूशन क्लब के सचिव पद के लिए हुए इस चुनाव में कुल 743 वोट डाले गए, जिनमें 669 इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग और 38 पोस्टल बैलेट के जरिए थे। यह क्लब के इतिहास में सबसे अधिक मतदान प्रतिशत में से एक रहा, जिसमें 1295 सदस्यों में से करीब 54% ने अपने मताधिकार का उपयोग किया। 26 राउंड की मतगणना के बाद रूडी ने 392 वोट हासिल किए, जबकि बालियान को 290 वोट मिले। शुरुआती राउंड में दोनों उम्मीदवारों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली, लेकिन 13वें राउंड के बाद रूडी ने निर्णायक बढ़त बना ली और अंत तक इसे बरकरार रखा।

25 सालों का दबदबा बरकरार  

राजीव प्रताप रूडी पिछले 25 वर्षों से कॉन्स्टिट्यूशन क्लब के सचिव पद पर काबिज हैं और इस जीत के साथ उन्होंने अपनी स्थिति को और मजबूत कर लिया। रूडी ने 1999 में पहली बार इस पद पर जीत हासिल की थी और कई बार निर्विरोध चुने गए थे। इस बार बीजेपी के दो दिग्गज नेताओं के बीच मुकाबला होने से चुनाव बेहद दिलचस्प हो गया था। रूडी ने अपनी जीत को अपने पैनल की मेहनत का नतीजा बताया, जिसमें बीजेपी, कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, टीडीपी और निर्दलीय सांसद शामिल थे। उन्होंने कहा, “मैं 100 से ज्यादा वोटों से जीता हूं। यह मेरे पैनल की जीत है, और मुझे पिछले दो दशकों की मेहनत का फल मिला है।”

बीजेपी बनाम बीजेपी और गुजरात लॉबी की हार

इस चुनाव को बीजेपी के अंदर एक शक्ति परीक्षण के रूप में देखा जा रहा था। बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने खुलकर संजीव बालियान का समर्थन किया था और दावा किया था कि बालियान जीतेंगे। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जुड़ी गुजरात लॉबी अंदरखाने बालियान का समर्थन कर रही थी। हालांकि, गुजरात लॉबी का प्रभाव इस बार रूडी के व्यापक समर्थन के सामने नाकाम रहा। रूडी को विपक्षी दलों के सांसदों का भी समर्थन प्राप्त था, जिसने उनकी जीत में अहम भूमिका निभाई। बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने इस मुकाबले को “बीजेपी बनाम बीजेपी” बताते हुए नए सांसदों के लिए इसे भ्रामक स्थिति करार दिया।

कॉन्स्टिट्यूशन क्लब का महत्व 

1947 में स्थापित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया सांसदों और पूर्व सांसदों के लिए एक सामाजिक और राजनीतिक मंच है। यह वही भवन है जहां संविधान सभा ने भारत का संविधान तैयार किया था। क्लब के पदेन अध्यक्ष लोकसभा अध्यक्ष होते हैं, लेकिन सचिव का पद कार्यकारी संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। रूडी ने अपने कार्यकाल में क्लब में आधुनिक सुविधाएं जोड़ने और इसके कायाकल्प का दावा किया, जबकि बालियान ने बदलाव का नारा देते हुए क्लब को केवल सांसदों और पूर्व सांसदों तक सीमित करने की बात कही।

जीत के बाद उत्साह

जीत के बाद रूडी की पत्नी नीलम प्रताप सिंह ने खुशी जाहिर करते हुए कहा, “कुछ पल बेहद रोमांचक थे, लेकिन अब हम सहज हैं। हम सबके साथ मिलकर जश्न मनाएंगे।” रूडी ने भी इसे लोकतंत्र की जीत करार देते हुए कहा, “यह सभी दलों का चुनाव है। देश के कोने-कोने से लोग आए, और मुझे लोकतंत्र की असली ताकत इस चुनाव में दिखी।”

क्या रहा खास?

इस बार का चुनाव क्लब के इतिहास में चौथा चुनाव था, इससे पहले 2009, 2014 और 2019 में चुनाव हुए थे। सचिव पद के अलावा, 11 कार्यकारी समिति के सदस्यों के लिए 14 उम्मीदवार मैदान में थे, जिनमें दीपेंद्र हुड्डा और नवीन जिंदल जैसे नाम शामिल थे। खेल सचिव के लिए राजीव शुक्ला, संस्कृति सचिव के लिए टी शिवा और कोषाध्यक्ष के लिए जितेंद्र रेड्डी को निर्विरोध चुना गया।

कॉन्स्टिट्यूशन क्लब का यह चुनाव न केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया थी, बल्कि यह भारतीय राजनीति में नेताओं के बीच प्रभाव और समर्थन की एक बड़ी परीक्षा भी साबित हुआ। रूडी की जीत ने साबित कर दिया कि गुजरात लॉबी के दबाव के बावजूद उनका दबदबा अभी भी बरकरार है।

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