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जनता को जागरूक करने वाले स्वयं कब निभाएंगे जिम्मेदारी

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जनता को जागरूक करने वाले स्वयं कब निभाएंगे जिम्मेदारी 

“फैले पड़े रहोगे, हम ही उठाएंगे” जैसे शब्दों से जागरूकता फैला रहे यातायात प्रभारी

रायबरेली।

जनपद में इन दिनों यातायात माह के अंतर्गत जन जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इस जागरूकता अभियान के दृष्टिगत पुलिस अधीक्षक डॉ० यशवीर सिंह के नेतृत्व में जनता को यातायात नियमों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। किन्तु यातायात प्रभारी इंद्रपाल सिंह द्वारा जिस तरह से जनता को जागरूक किया जा रहा है उसे देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि वह जनता को जागरूक करने के बजाय जनमानस के मन में डर फैला कर यातायात नियमों का पालन करवाने का अभियान चला रहे हैं और स्वयं नियमों का पालन करने में कोई रुचि नही रखते।

ज्ञात हो कि यातायात जागरूकता अभियान अंतर्गत नगर के त्रिपुला चौराहे पर यातायात प्रभारी इंद्रपाल सिंह अपने दल बल के साथ जनता को जागरूक करने हेतु पहुंचे, एक वाहन चालक को रोककर हेलमेट के लिए पूंछा तो वाहन चालक द्वारा मुस्कुराकर उनका अभिवादन करते हुए अपनी स्वास्थ्य समस्या के बारे में अवगत कराया गया किन्तु यातायात प्रभारी को वह मुस्कान इस कदर नागवार गुजरी कि उन्होंने वाहन चालक से गुस्से भरे अंदाज़ में कहा, “हम यहां इतनी मेहनत कर रहे हैं और तुम हंस रहे हो, किसी दिन फैले पड़े रहोगे तो हम ही उठाने आएंगे, घरवाले भी नही दिखाई देंगे।”

जनता से इस प्रकार से रूबरू होने वाले यातायात प्रभारी को कदाचित स्वयं अपने वाहन पर ध्यान देना भूल गए जो चंद कदमों की दूरी पर सड़क पर खड़ा था, जिसके कारण यातायात बाधित हो रहा था, उसी समय विद्यालय की छुट्टी होने से विद्यार्थियों का आवागमन हो रहा था ऐसे में यातायात प्रभारी का यह वाहन किसी भी दुर्घटना का कारण बन सकता था। वहीं दूसरी ओर अपने विभागीय वाहन में बिना सीट बेल्ट लगाए बैठे सहकर्मियों को देखकर उनपर कोई कार्यवाही करने के बजाय वह स्वयं हंसते दिखाई दिए।

अब यातायात प्रभारी के इस कार्यशैली तथा इन शब्दों से ऐसा प्रतीत होता है कि कदाचित वह जागरुकता अभियान में मेहनत करके अपने कर्तव्यों का निर्वहन नही बल्कि जनता पर उपकार कर रहे हैं, जनता को सुरक्षा का आभास कराने के स्थान पर उसे भयभीत कर किसी तरह जनसुरक्षा के नाम पर खानापूर्ति कर रहे हैं और साथ साथ चिराग तले अंधेरा वाली कहावत को पूरी तरह चरितार्थ कर रहे हैं।

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