
लालगंज में राजकीय महिला महाविद्यालय बनवाने की मांग
पूर्व विधायक ने किया एक करोड़ देने का संकल्प

संवाददाता
लालगंज, रायबरेली।
लालगंज बैसवारा क्षेत्र की बेटियों को उच्च शिक्षा की बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने हेतु सरेनी के पूर्व विधायक सुरेन्द्र बहादुर सिंह एवं क्षेत्रवासियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर लालगंज तहसील के ग्राम महमदमऊ गांव के निकट आईटीआई प्रशिक्षण केन्द्र के ठीक सामने राजकीय महिला महाविद्यालय के नाम से वर्षों पूर्व आरक्षित भूमि पर तत्काल महाविद्यालय की स्थापना कराने का अनुरोध किया है। पत्र में सरकारी भूमि पर संभावित अतिक्रमण की आशंका जताते हुए शीघ्र निर्णय लेने की अपील की गई है। मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र के अनुसार ग्राम महमदपुर में खाता संख्या 00206 में 4.0470 हेक्टेयर भूमि राजकीय महिला महाविद्यालय के नाम दर्ज है। इसके बावजूद आज तक महाविद्यालय की स्थापना नहीं हो सकी। पत्र में खाली पड़ी इस सरकारी भूमि पर अतिक्रमण कर स्थायी निर्माण होने का आशंका जताई गई।

साथ ही इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि प्रस्तावित स्थल लालगंज-रायबरेली मार्ग पर आधुनिक रेल कोच फैक्ट्री के निकट स्थित है, जिससे क्षेत्र के विभिन्न गांवों की छात्राओं के लिए यहां तक पहुंचना आसान रहेगा क्योंकि वर्तमान में बैसवारा क्षेत्र की अधिकांश छात्राओं को स्नातक स्तर की पढ़ाई के लिए रायबरेली, ऊंचाहार अथवा अन्य कस्बों का रुख करना पड़ता है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की अनेक छात्राएं दूरी और संसाधनों के अभाव में आगे की पढ़ाई बीच में ही छोड़ने को विवश हो जाती हैं, ऐसे में राजकीय महिला महाविद्यालय की स्थापना क्षेत्र की बेटियों के लिए एक बड़ी सौगात साबित हो सकती है।
पूर्व विधायक सुरेन्द्र बहादुर सिंह ने मुख्यमंत्री से वर्ष 2027 से पूर्व बैसवारा की धरती पर आयोजित किसी जनसभा के दौरान महाविद्यालय की स्थापना की घोषणा का अनुरोध किया है। उन्होंने यह भी घोषणा की है कि महाविद्यालय भवन के निर्माण के लिए अपनी पूजनीय माता की स्मृति में एक करोड़ रुपये का आर्थिक सहयोग देने का संकल्प लेते हैं। इसे उन्होंने क्षेत्र के शैक्षिक विकास में अपनी सामाजिक भागीदारी बताया है।
ज्ञात हो कि बैसवारा क्षेत्र में लंबे समय से राजकीय महिला महाविद्यालय की मांग उठती रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पहले से उपलब्ध सरकारी भूमि पर महाविद्यालय स्थापित कर दिया जाए तो हजारों छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए दूसरे शहरों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। वहीं, खाली पड़ी भूमि को भी अतिक्रमण से बचाया जा सकेगा। अब लोगों की निगाहें मुख्यमंत्री स्तर पर होने वाले निर्णय पर टिकी हैं, क्योंकि यह मांग केवल एक महाविद्यालय की स्थापना नहीं, बल्कि बैसवारा की बेटियों के भविष्य, महिला शिक्षा और क्षेत्र के समग्र विकास से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बन चुकी है।
Author: Vikas Srivastava









