महिला जनप्रतिनिधि के प्रतिनिधियों पर लगी रोक, अब बैठकों में नहीं चलेगा पति-पुत्र का दबदबा

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महिला जनप्रतिनिधि के प्रतिनिधियों पर लगी रोक

अब बैठकों में नहीं चलेगा पति-पुत्र का दबदबा

 

लखनऊ।

योगी सरकार ने स्थानीय निकायों में महिलाओं की भागीदारी को लेकर बड़ा और साहसी कदम उठाया है। अब नगर निगम, नगर पालिका परिषद और नगर पंचायतों की प्रशासनिक बैठकों में चुनी हुई महिलाओं की जगह उनके पति, पुत्र या किसी प्रतिनिधि की एंट्री पूरी तरह बैन कर दी गई है। निदेशक, स्थानीय निकाय ने इस संबंध में सभी नगर निकायों को सख्त निर्देशों के साथ पत्र जारी किया है। विगत लंबे समय से महिलाओं के नाम पर राजनीति करने वाले उनके प्रतिनिधि असली सत्ता का आनंद ले रहे थे। कई बैठकों में पार्षदों की कुर्सियों पर पति या पुत्र विराजमान होकर फैसले लेते दिखते थे, जबकि चुनी हुई महिला प्रतिनिधि पीछे छूट जाती थीं।

योगी सरकार का यह फैसला महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक माना जा रहा है। स्थानीय राजनीति में प्रॉक्सी कल्चर पर यह सीधा प्रहार है। अब महिलाओं को अपनी जिम्मेदारी खुद निभानी होगी और जनता से सीधे संवाद करना होगा। वहीं, जानकारों का कहना है कि सरकार को केवल बैठकों में प्रतिबंध तक सीमित न रहकर “प्रतिनिधि” शब्द पर ही स्थायी रोक लगानी चाहिए, ताकि महिला के नाम पर राजनीति करने वाला कोई और “मालिक” न बन सके।

Vikas Varta
Author: Vikas Varta

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