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नगर पालिका अध्यक्ष की कार्यशैली से हो रहा नगर का बंटाधार

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नगर पालिका अध्यक्ष की कार्यशैली से हो रहा नगर का बंटाधार 

सत्ता के मद में डूबे नगर पालिका अध्यक्ष के को नही दिखती सड़कों की बदहाली 

रायबरेली।

नगर पालिका चुनाव के दौरान जनता से विकास का वादा करके करके वोट लेने वाले नगर पालिका अध्यक्ष शत्रोहन सोनकर सत्ता मिलते ही जनता से किए गए अपने वादों को भूल गए और उनका सेवा भाव भी सत्ता के मद में दब गया। नगर में चारों ओर सड़कों की स्थिति, मोहल्ले में टूटी गलियां, बरसात में उफ़नाती हुई नालियां अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही हैं मगर सत्ता के नशे में मदमस्त हुए नेताजी को शायद नगर की यह दुर्दशा दिखाई नहीं देती।

सत्ता के मद में चूर नगर पालिका अध्यक्ष मीडिया के सवालों पर उल्टी सीधी दलीलें देकर अपने दायित्वों से अपना पल्ला झाड़ने से बाज़ नहीं आते। जब पत्रकारों द्वारा पालिका अध्यक्ष से नगर की स्थिति को लेकर बात की गई तो नेताजी भड़क गए और पत्रकारों से बदसलूकी करते हुए दूसरों के सिर पर बदहाली का दोष मढ़ने लगे। इतना ही नही नेता जी को शासन द्वारा दिए गए निर्देशों की कोई जानकारी नही है और न ही संवैधानिक नियमों की। कदाचित इसलिए काम न करने के अनेक बहाने बनाते नज़र आते हैं। कभी ईओ से टकराव तो कभी शासन से बजट न मिलने का बहाना बताते रहते हैं। इतना ही नही अपनी कार्यशैली से नेताजी अपने पद की संवैधानिक मर्यादाओं को तार-तार करने में कोई कसर नहीं छोड़ते। नेताजी को सत्ता संभाले लगभग 1 वर्ष हो गया है और इस 1 वर्ष में कहीं थोड़ा सा काम करवाने के बाद नेताजी उसी का बखान करके अपनी पीठ थपथपाते रहते हैं। अब इसे अनुभव की कमी कहें या अहंकार। परन्तु जब सत्ता में ऐसे लोग महत्वपूर्ण संवैधानिक पदों पर बैठते हैं तो इन पदों की गरिमा और देश का बंटाधार होना स्वाभाविक है। इस स्थिति में यह कहना गलत नही होगा कि नगर पालिका अध्यक्ष शत्रोहन सोनकर नाच न आवे आंगन टेढ़ा की कहावत को पूरी तरह से चरितार्थ कर रहे हैं और उनकी इस कार्यशैली का खामियाजा कहीं ना कहीं पूरी कांग्रेस पार्टी को भुगतना पड़ सकता है।

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