
वन कर्मियों पर भू माफिया से साठगांठ करके वृक्षों को कटवाने का लगा आरोप
उच्चाधिकारियों से लेकर मुख्यमंत्री तक लगाई गुहार फिर भी नही मिला न्याय
पीड़ित की लाचारी से शासन की मंशा पर उठ रहे सवाल
रायबरेली।
जनपद में आए दिन प्रतिबंधित वृक्षों के कटान की खबरें मीडिया की सुर्खियों में बनीं रहती हैं और तमाम शिकायतों के बावजूद इस पर अंकुश लगाने में वन विभाग असफल रहा है। इस असफलता को लेकर कई बार विभागीय कर्मचारियों पर मिलीभगत के आरोप भी लगते रहते हैं। ऐसा ही एक मामला लालगंज थाना क्षेत्र का सामने आया है जहां विभागीय कर्मचारियों पर भूमाफियाओं से मिलीभगत करके भू स्वामी की भूमि पर लगे फूल व फलदार वृक्षों को कटवाने का आरोप लगाया गया है।
थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम सूदन खेड़ा, आचार्य नगर निवासी ओम प्रकाश आज़ाद ने बताया कि मैंने डेढ़ साल पहले एक प्रार्थना पत्र देकर अपने पेड बचाए रखने की गुजारिश की थी परन्तु वन रक्षक नीरज कुमार शर्मा व वन दरोगा महेन्द्र नाथ मिश्रा एवं राजस्व अधिकारी ज्ञानेन्द्र प्रताप सिंह व अजीत प्रताप सिंह द्वारा भू-माफिया देवेन्द्र बहादुर, प्रताप बहादुर, साक्षी सिंह, बी.पी. सिंह व आदित्य सिंह आदि से जबरन साजिश के तहत मेरी भूमि पर उगे हुए पचास-साठ साल के पेड़ पौधे नीम, आम, फूल फलदार वृक्ष एवं वृक्षदार पेड़ों को जबरन कटा ले गये। जबकि सरकारी कर्मचारी होने के बावजूद वनरक्षक द्वारा देवेन्द्र सिंह, प्रताप बहादुर व साक्षी सिंह के इशारे पर एक मोटी रकम लेकर खुले आम नगर पंचायत लालगंज सड़क के किनारे पेड़ों को काटा गया और मात्र 5 पेड़ का परमिट दिखाकर ऐसी साजिश की गयी।

पीड़ित ने बताया कि उक्त लोगों ने वनरक्षक नीरज कुमार शर्मा को काफी मोटी रकम देकर एक सोची समझी साजिश के तहत सैकड़ो फलदार, नीम व आम के पेड़ों को कटा कर जबरन ठेकेदारों के मार्फत भरे मार्केट में ले जाकर बेंच दिया जिससे मुझे व मेरे परिवार को लाखों रूपये का भारी नुकसान हुआ है और वन सम्पदा के साथ-साथ वातावरण व छायादार व फलदार वृक्षों के कटने से प्रकृति का काफी बड़ा नुकसान हुआ है जो पूरा नहीं किया जा सकता। कई बार उच्च अधिकारियों को इसकी सूचना दी गई किन्तु भूमाफियों को रोका नहीं गया और भारी मात्रा में प्रकृति का नुकसान करा दिया गया। परगना मजिस्ट्रेट अजीत प्रताप सिंह व तहसीलदार ज्ञान प्रकाश सिंह आदि द्वारा फर्जी तरीके से साजिश रचकर उक्त घटना को अंजाम दिया गया, जबकि उक्त पेड़ों व दुकान के संबंध में माननीय उच्च न्यायालय लखनऊ खण्डपीठ से आदेश भी मेरे पक्ष में हुआ है। जनपद एवं सत्र न्यायालय रायबरेली में भी मुकदमा विचाराधीन है।
पीड़ित ने आगे बताया कि दिनांक 08 दिसंबर 2022 को सुबह लगभग 10 बजे ब्रहमप्रकाश सिंह पुत्र प्रताप बहादुर सिंह, प्रताप बहादुर व देवेन्द्र सिंह पुत्रगण स्व० राजेन्द्र बहादुर सिंह आलमपुर, संतबक्श पुत्र चन्द्रभान नि० शाहपुर, अरविन्द साहू पुत्र अज्ञात, निरंजन राय पुत्र नन्द राय सिंह, लालजी यादव पुत्र छोटेलाल नि० आलमपुर, अंशू व नन्हे पुत्र अशोक यादव, विकाश व बब्लू यादव पुत्र भगवानदीन, जय बहादुर पुत्र राधे यादव, ओपी कुशवाहा पुत्र बुद्धिलाल निवासी सोहाई बाग, दीपक सिंह पुत्र महादेव सिंह, मानस गुप्ता पुत्र अज्ञात, अभयराज सिंह बरहा पुत्र अज्ञात, ऋषभ श्रीवास्तव पुत्र प्रदीप निवासी नई बाजार, संजय यादव पुत्र अज्ञात, आलमपुर तिराहा होटल वाले अंकुर बाजपेई पुत्र अज्ञात निवासी बाम्बे कालोनी मलपुरा, राजू जलेबी पुत्र अज्ञात निवासी नई बाजार प्राचार्य आवास, नीलू उर्फ शिवशंकर वर्मा पुत्र अज्ञात निवासी सूदन खेड़ा, यतीन सिंह चौहान पुत्र रवी नन्दन सिंह निवासी कोरिहाई मण्डी, गिरजेश सिंह पुत्र कल्लू सिंह निवासी धन्नीपुर एवं आदित्य सिंह पुत्र देवेन्द्र बहादुर सिंह निवासी आलमपुर व अन्य 1 दर्जन अपराधी किस्म के लोग जबरन दीवार फांदकर मेरे घर के अन्दर अवैध असलहों के बल पर एक राय होकर घुस आये और धक्का मुक्की करते हुए हाथा पाई करने लगे तथा जान से मारने की धमकी देते हुए जाति सूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए कहा कि यहां से चले जाओ यह घर व पूरी सम्पत्ति हमारी है, अभी तो हम लोगों ने तुम्हारी दुकान व उसमें रखा हुआ लाखों रूपये का टिम्बर स्टोर का सामान जबरन लूटा है। अब तुम्हारा घर भी व गृहस्थी का पूरा सम्मान ले लेंगे और साथ में आये हुए दर्जनों लेबर जिनके हाथों में फावड़े व कुदाल बेलचे आदि लोहे के सामान थे उनसे जबरन खुदाई कराते हुए मेरे घर के चारों तरफ लोहे के राड़ों के सहारे लोहे की टीने लगाते हुए पूरे घर को चारों तरफ घेरवा कर कब्जा कर लिया। मेरे घर के आस-पास ग्राम सभा की जमीन व पास में तालाब तथा दुकान व साथ-साथ खाली पड़ी जमीन पर गाली गलौज करते हुए अवैध कब्जा कर लिया और मेरे परिवार को कब्जे में कर असलहो के बल पर बाहर आने जाने पर रोक लगा दी तथा जबरन परिवार को कब्जे में रखकर हत्या करने के इरादे से घर में रखे हुए जरूरी कागजात व अन्य कीमती सामान तथा प्लास्टिक की कुर्सियां तोड़कर फेकने लगे जिससे प्रार्थी का करीब एक लाख रूपये का नुकसान हुआ। मैंने किसी तरह इनकी कैद में रहकर चोरी छुपे मुख्यम हेल्पलाइन 1076, डी०जी०पी० व उत्तर प्रदेश के उच्चाधिकारियों सहित आई०जी०, पुलिस अधीक्षक, जिलाधिकारी को मोबाइल के द्वारा सूचित किया जिसके बाद दो सिपाही कोतवाली से आये और मुझे अपने साथ मोटर साइकिल से लेकर कोतवाली लालगंज ले जाकर बुरी तरह से अपमानित करते हुए कहा कि तुम अपने घर चले जाओं और जो वो लोग कर रहे हैं करने दो नही तो तुम्हारी हत्या हो जाएगी तो हम लोग जिम्मेदार नही हैं।

उक्त प्रकरण को लेकर में पीड़ित ने बताया कि इस प्रकरण में तमाम उच्चाधिकारियों समेत मुख्यमंत्री तक न्याय की गुहार लगा चुका हूं किन्तु कहीं सुनवाई नही हुई। ऐसे में यह प्रकरण शासन की मंशा पर कई सवाल खड़े करता है।
Author: Vikas Srivastava











