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सत्ता बदलते ही आई सुविधाओं में कमी, अस्पताल में मिल रही सैंपल में फेल हुई दवाएं

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सत्ता बदलते ही आई सुविधाओं में कमी 

पानी की समस्या से जूझते मरीज़ 

अस्पताल में मिल रही सैंपल में फेल हुई दवाएं

नई दिल्ली।

देश की राजधानी दिल्ली में स्थित प्रमुख चिकित्सीय संस्थानों में से एक मानव व्यवहार एवं सम्बद्ध विज्ञान संस्थान में आने वाले वाले मरीजों को अनेक समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। विगत तीन चार माह से मरीजों को मिलने वाली आम सुविधाओं में जिस तरह से कमी देखने को मिल रही है उससे जनता के मन में कई सवाल उठ रहे हैं। कोई इसे सत्ता परिवर्तन का असर कह रहा है तो कोई विपक्ष की राजनीति। अब इन चर्चाओं में कितनी सत्यता है यह तो जिम्मेदार ही जानें।

ज्ञात हो कि बीते तीन चार माह से मरीजों को मिलने वाली आम सुविधाओं में कमी यथा शौचालय का बंद होना, जो खुले हैं उनमें भी पानी न आना, पीने के पानी हेतु लगी मशीनों में भी पानी न आना और इनके साथ ही संस्थान में कई दवाओं का न मिलना तथा चिकित्सीय कर्मचारियों का मरीजों से दुर्व्यवहार स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। लोगों की मानें तो केजरीवाल के मुख्यमंत्री रहने तक सारी व्यवस्थाएं ठीक थीं लेकिन जब से सत्ता की कमान आतिशी के हाथ में गई है तब से सारी व्यवस्थाएं गड़बड़ हो गई हैं तो वहीं कुछ लोगों का कहना है कि यह सब केंद्र सरकार द्वारा एल जी के इशारे पर आप सरकार को बदनाम करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। फिलहाल वास्तविकता क्या है यह तो जांच का विषय है। सूत्रों की मानें तो संस्थान में तैनात जेई मेंटीनेंस के जाने के बाद से पानी की समस्या खड़ी हो गई है जिसके कारण शौचालय बंद कर दिए गए हैं।

इस सम्बन्ध में संस्थान के निदेशक डॉ. राजिंदर के. धमीजा ने बताया कि व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने हेतु निरन्तर प्रयास किए जा रहे हैं। बंद पड़े शौचालय के बारे में उन्होंने बताया कि उन्हें तुड़वाकर उनके स्थान पर नए शौचालय बनवाए जाने हैं इसीलिए उन्हें बंद रखा गया है साथ ही पानी की समस्या पर उन्होंने कहा कि मरीजों की अत्यधिक संख्या होने के कारण कभी कभी समस्या हो जाती है इसके लिए जल बोर्ड से संपर्क करके शीघ्र ही समस्या के समाधान का आश्वासन देते हुए तत्काल सम्बंधित को निर्देशित किया। सैंपल फेल दवाएं मिलने के बारे में पूछने पर उन्होंने बताया कि अब सब ठीक है, संस्थान में 90 प्रतिशत दवाएं उपलब्ध हैं।

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