Search
Close this search box.

भोपाल लिंक अस्पताल घोटाला: सीएम रिलीफ फंड से लगभग 50 लाख की फर्जी सहायता

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

भोपाल लिंक अस्पताल घोटाला: सीएम रिलीफ फंड से लगभग 50 लाख की फर्जी सहायता

अस्पताल बंद होने के बाद भी मिला भुगतान

अस्पताल मालिक पर धोखाधड़ी और रासुका के तहत मामला दर्ज करने की मांग

 

हरि शंकर पाराशर 

भोपाल। 

प्रदेश में चिकित्सा व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर करते हुए पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह ने विधानसभा में बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि मकसूदानगढ़, गुना में फर्जी तरीके से भोपाल लिंक अस्पताल के नाम पर संचालित एक अस्पताल को बीते 10 महीनों में मुख्यमंत्री रिलीफ फंड से 48 लाख 70 हजार रुपए की फर्जी सहायता राशि दी गई है। चौंकाने वाली बात यह है कि यह अस्पताल अप्रैल 2025 में बंद हो चुका था, फिर भी मई में सहायता राशि जारी की गई।

पूर्व मंत्री ने आरोप लगाया कि फर्जी अस्पताल संचालक राजेश शर्मा द्वारा सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से 50 लाख रुपए की राशि निकाल ली गई। जांच में सामने आया कि अस्पताल स्थलीय अस्तित्व में ही नहीं था और कई मरीजों के नाम पर फर्जी भुगतान किया गया, जिनका सच्चाई में आवेदनों से कोई लेना-देना नहीं था। बैरसिया के मरीजों को दिखाकर फर्जीवाड़ा किया गया और वास्तविकता में इलाज नहीं हुआ। ऐसे दो मरीजों के नाम सामने आए जिन्होंने कभी आवेदन नहीं किया, फिर भी उनके नाम पर सहायता मिली। गुना के मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने प्राथमिकी प्रश्न उठने के एक दिन बाद जांच के आदेश दिए, जिसके बाद अस्पताल का कोई अस्तित्व नहीं मिला। इसके बावजूद अस्पताल संचालक राजेश शर्मा ने 4 अप्रैल 2025 को अस्पताल बंद करने का आवेदन दिया था और अप्रैल के बाद भी राशि का निर्गमन हुआ।

जयवर्धन सिंह ने सवाल उठाया कि सीएमएचओ गुना ने किस आधार पर अस्पताल को अनुमति दी और इस पूरे घोटाले की जिम्मेदारी किसकी है। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखने की बात कही और मांग की कि फर्जी अस्पताल व संचालक पर धोखाधड़ी और राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) तहत कठोर कार्यवाही की जाए।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रदेश में इस तरह कई फर्जी डॉक्टर और फर्जी अस्पताल सक्रिय हैं, जिससे गरीबों के स्वास्थ्य अधिकारों के साथ खिलवाड़ हो रहा है। इस बेमिसाल घोटाले ने प्रदेश भर की स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक सतर्कता पर बड़े प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं और यह मामला प्रदेश ही नहीं वरन् राष्ट्रीय स्तर पर बहस का विषय बन गया है।

निष्पक्ष पत्रकारिता हेतु QR Code को स्कैन कर अपना अमूल्य सहयोग प्रदान कर हमें मजबूती प्रदान करें।

 

Leave a Comment

और पढ़ें