
“वेल्स्पन उद्योग क्यों नहीं लगा” जैसे कालजयी प्रश्न से कन्नी काट गए सांसद शर्मा
हरि शंकर पाराशर
कटनी।
माइनिंग कान्क्लेव के दौरान मीडिया से रूबरू हुए स्थानीय सांसद बीडी शर्मा से पत्रकारों ने ऐसे सवाल कर दिए, जिनसे सांसद बीडी शर्मा ने ऐसे किनारा किया जैसे किसी ने सच्चाई को बे-नकाब कर दिया और सांसद ने नकाब वापस चढ़ा दी। प्रश्न था कि श्रीमान जी, कटनी में खनिज उद्योग में निवेशकों को प्रेरित करने के लिए माइनिंग कान्क्लेव की जा रही है और भाजपा की डबल इंजन सरकार की नीतियों के कारण कटनी में लगभग स्थापित हो चुकी इनर्जी उत्पादक इकाई वेल्स्पन को अपना झोला उठाकर क्यों भागना पड़ा, उन्हें कोयला नहीं मिला, सांघी सीमेंट भी झोला उठाकर क्यों भाग गई।ज्वालामुखी जैसे दहकते सवालों की तपिश से बीडी भाईसाब ने सकारात्मकता का कंबल ढांप लिया। उनका जबाव था कि मुझे नहीं मालूम पूर्व में क्या हुआ, वर्तमान में हमें सकारात्मक रूख के साथ बढऩा चाहिए। प्रतिक्रियात्मक प्रश्न पर भी उन्होंने सकारात्मकता का आलंबन (सहारा) लेकर ठोस सवाल से कन्नी काटी और चलते बने।

इन सवालों का सामना करना सांसद, सीएम, पीएम सबके लिए दुष्कर कार्य है। कारण साफ है वेल्स्पन ग्रुप को भी इसी तरह का भरोसा दिया था कि म.प्र. शासन औद्योगिक निवेशकों को सभी सुविधाएं देगा, लेकिन भूमि अधिग्रहण में इतने पापड़ बेलने पड़े कि वेल्स्पन कंपनी को छठी का दूध याद आ गया। उस समय सिंगल इंजन सरकार थी, बाद में सरकार में डबल इंजन लग गए, लेकिन वेल्स्पन की उर्जा इकाई स्थापित नहीं हुई।
किसानों ने जमीन-रोजगार सब गंवाया

कंपनी ने बुजबुजा-डोकरिया में सैकड़ों किसानों की दोहरी कृषि भूमि ली और प्रभावित किसान के परिवार को एक रोजगार देने की बात कही थी। लेकिन भाजपा शासन की औद्योगिक नीतियों की खामी के चलते कंपनी स्थापित नहीं हुई, अब संभवत: अघोषित राष्ट्र सेठ वह भूमि कौडिय़ों के भाव ले लें तो ताज्जुब नहीं होगा। किसान अपनी रोजी रोटी के साधन कृषि से भी वंचित हुआ और रोजगार तो दिवा-स्वप्र जैसा हो गया कि अच्छे दिन आने वाले हैं, जो ऐसे सपने इस जन्म में साकार नहीं होने वाले हैं।
Author: Vikas Srivastava










