
ग्राम पंचायतों में हुआ लाखों का घोटाला, ग्रामीणों में उबाल

हरि शंकर पाराशर
शहडोल।
मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में ग्राम पंचायतों में वित्तीय अनियमितताओं का नया मामला सामने आया है। गोहपारू जनपद पंचायत के रामपुर ग्राम पंचायत में बूंदी, समोसे और आंगनबाड़ी सामग्री के नाम पर लाखों रुपये के संदिग्ध बिल पास किए गए। सोशल मीडिया पर वायरल बिल ने इस कुप्रबंधन को उजागर किया है, जिसके बाद ग्रामीणों ने तत्काल जांच और दोषियों पर कड़ी कार्यवाही की मांग की है।
बूंदी-सामोसे पर ₹66,950/-, चिमटा-कुर्सी पर ₹53,000/-
रामपुर ग्राम पंचायत में हाल के दो महीनों में बूंदी और समोसे के लिए ₹66,950/- के पांच बिल और आंगनबाड़ी केंद्र के लिए कुकर, कुर्सी, गिलास व चिमटा जैसी वस्तुओं पर ₹53,000/- के तीन बिल पास किए गए। सोशल मीडिया पर वायरल इन बिल में खर्च का विवरण प्रकट करते हुए ग्रामीणों का कहना है कि इतने बड़े खर्च का कोई पुख्ता आधार नहीं है। बिल जारी करने वाले होटल मालिक अब्दुल अली ने कहा,“मैं रोजाना कई बिल बनाता हूं। बिल का विवरण देखने पर ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि किस खर्च की बात हो रही है।” हालांकि, उनका यह बयान ग्रामीणों को आश्वस्त करने में नाकाम रहा।
जांच के आदेश, सरपंच-सचिव पर कार्यवाही का भरोसा
गोहपारू जनपद पंचायत के सीईओ ने मामले की तत्काल जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही सुनिश्चित होगी। जिला पंचायत सीईओ सौम्या आनंद ने भी इस तरह के मामलों को गंभीरता से लेने का आश्वासन दिया। उन्होंने बताया कि जयसिंहनगर और बुढ़ार की ग्राम पंचायतों में पहले भी समान गड़बड़ियां सामने आई थीं, जिनकी जांच जारी है।
पहले भी बेनकाब हो चुके भ्रष्टाचार के मामले
यह पहला मामला नहीं है। जयसिंहनगर की कुदरी ग्राम पंचायत में दो फोटोकॉपी के लिए ₹4,000/- और बुढ़ार जनपद पंचायत के भठिया गांव में 2,500 ईंटों के बदले ₹1,25,000/- का बिल बनाया गया था। इन मामलों में जिला पंचायत सीईओ ने सरपंच और सचिव को नोटिस जारी किए थे। साथ ही, एसडीएम और जनपद पंचायत सीईओ को जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए थे।
ग्रामीणों का आक्रोश, पारदर्शिता पर उठे सवाल
रामपुर के ग्रामीणों में इस कुप्रबंधन को लेकर भारी रोष है। उन्होंने सरकार से निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत फंड का दुरुपयोग ग्रामीण विकास को बाधित कर रहा है। यह मामला पंचायत प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही के अभाव को रेखांकित करता है।
जांच का इंतजार, ग्रामीणों को जल्द न्याय की उम्मीद
प्रशासन की ओर से जांच के भरोसे के बावजूद ग्रामीणों को त्वरित न्याय की अपेक्षा है। यह मामला पंचायतों में वित्तीय अनियमितताओं को रोकने के लिए सख्त तंत्र की आवश्यकता को उजागर करता है। प्रशासन का अगला कदम पंचायत प्रणाली में सुशासन की दिशा में महत्वपूर्ण होगा।
शहडोल में ग्राम पंचायतों में बिल के नाम पर लाखों रुपये का कुप्रबंधन भ्रष्टाचार के गहरे जड़ों और प्रशासनिक सुस्ती को बेनकाब करता है। ग्रामीणों की मांग है कि इस मामले में निष्पक्ष और त्वरित जांच हो और दोषियों को कड़ी सजा मिले। यह मामला पंचायत प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने की चुनौती को सामने लाता है।
Author: Vikas Srivastava










