ऊर्जा संगम 2025 के चौथे दिन तकनीक, नवाचार और सामाजिक सहयोग का हुआ संगम
“निर्माण कॉन्क्लेव” ने दी सामाजिक बदलाव की प्रेरणा

जायस, अमेठी।
राजीव गांधी पेट्रोलियम प्रौद्योगिकी संस्थान, जायस में ऊर्जा संगम 2025 के तीसरे एवं चौथे दिन उर्जोत्सव 2025 और सौहार्द्य 2025 के कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम के चौथे दिन 13 नवम्बर 2025 को निर्माण कान्क्लैव-2025 का सफल समापन हुआ। यह कार्यक्रम सात दिवसीय वार्षिक महोत्सव ऊर्जा संगम के सोशल फेस्टिवल सौहार्द्य -2025 का प्रमुख आकर्षण रहा, जिसमें सामाजिक नवाचार, युवा नेतृत्व, सामुदायिक विकास और नीति-निर्माण पर सार्थक विमर्श हुआ। कार्यक्रम के प्रारंभ में फैकल्टी कोऑर्डिनेटर डॉ. अरविन्द सिंह ने सभी मुख्य अतिथियों का स्वागत किया। छात्र संयोजक हर्षित पांडे एवं कौशल कुमार शर्मा ने अभिनंदन किया एवं कान्क्लैव की भूमिका रखी।
इन आयोजनों ने छात्रों में नवाचार, टीमवर्क और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को बढ़ावा दिया। इस कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में चंदन झा (एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट, GeeksforGeeks एवं पूर्व वैज्ञानिक, ISRO) ने छात्रों को प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि इंजीनियरिंग की असली नींव डिजिटल लॉजिक, डेटा स्ट्रक्चर, एल्गोरिथम और डीबीएमएस में महारत से बनती है। आत्मविश्वास, विश्लेषणात्मक सोच और निरंतर सीखना सफलता की कुंजी हैं। IIT इंदौर के पूर्व छात्र एवं Ask Senior के संस्थापक जसकरन सिंह ने टीमवर्क, दृढ़ता और अनुशासन के महत्व पर जोर दिया और छात्रों को जिज्ञासु बने रहने तथा असफलताओं से सीखने के लिए प्रेरित किया। श्रृंखला के अन्य वक्ता डॉ. प्रदीप कुमार श्रीवास्तव (पूर्व निदेशक, केंद्रीय औषध अनुसंधान संस्थान, लखनऊ) ने ‘Scientoons’ की अवधारणा प्रस्तुत की और बताया कि प्रकृति से प्रेरणा लेकर कई तकनीकी नवाचार हुए हैं, जैसे चींटियों से संरचनात्मक डिज़ाइन और किंगफिशर से ट्रेनों की एयरोडायनामिक संरचना। इसके पश्चात आयोजित तकनीकी और रचनात्मक प्रतियोगिताओं ने छात्रों की रचनात्मकता और तकनीकी समझ को नई दिशा दी। तत्पश्चात विशिष्ट अतिथि जय सिंह (आईआईएस) ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि संवाद आज समाज में परिवर्तन लाने का सबसे प्रभावी माध्यम है। यदि युवा सकारात्मकता, सत्यता और संवेदनशीलता के साथ सामाजिक मुद्दों पर संवाद स्थापित करें, तो वे परिवर्तन के सबसे प्रबल दूत बन सकते हैं। युवाओं को जानकारी के साथ उसके सामाजिक प्रभाव की समझ विकसित करनी चाहिए।
विशिष्ट अतिथि योगेश कुमार, वाणिज्यिक निदेशक, एमवीवीएनएल ने कहा कि तकनीक, जिम्मेदारी और सेवा-यही सशक्त समाज की तीन धुरी हैं। जब युवा तकनीकी कौशल के साथ सेवा-भाव और सामाजिक उत्तरदायित्व को जोड़ते हैं, तभी विकास की सच्ची परिभाषा साकार होती है। ऊर्जा क्षेत्र की उभरती तकनीकों के साथ समाज के अंतिम व्यक्ति तक सेवा पहुँचाना ही हमारा लक्ष्य होना चाहिए।
मुख्य अतिथि प्रो. अरविंद कुमार जोशी, पूर्व अधिष्ठाता, बीएचयू उन्होंने कहा कि “युवाओं में नेतृत्व, संवेदनशीलता और सामाजिक चेतना का विकास राष्ट्र निर्माण की वास्तविक आधारशिला है। आज का युवा केवल तकनीक का उपयोगकर्ता नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाला परिवर्तनकारी बन सकता है। ऐसे आयोजनों से छात्रों को नैतिकता, मूल्य और व्यवहार-तीनों आयामों पर नई ऊर्जा मिलती है, जो उन्हें भविष्य का जिम्मेदार नागरिक और प्रभावी नेतृत्वकर्ता बनने में सक्षम बनाती है।” कार्यक्रम संयोजन डॉ अरविन्द सिंह ने बताया कि यह कार्यक्रम का उदेशय है कि नई पीढ़ी अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान में करे -यही सशक्त और विकसित भारत की दिशा है। अंत में लेट्स गिव होप फ़ाउंडेशन के आशीष मौर्य एवं आदवन से कृष्णा जायसवाल ने अपने सामाजिक अनुभवों को साझा किया।
सौहार्द्य के अन्य प्रमुख कार्यक्रम में प्रतिबिंब कार्यक्रम में छात्रों ने सामाजिक सरोकार, जन-जागरूकता, पर्यावरण, स्वच्छता और मानवीय मूल्यों पर आधारित प्रभावशाली झलकियां प्रस्तुत कीं। निर्णायकों और दर्शकों ने इन्हें अत्यंत सराहनीय तथा संवेदनशील अभिव्यक्ति बताया। रिवाज कार्यक्रम के माध्यम से स्थानीय कारीगरों और हस्तशिल्पकारों को मंच प्रदान किया गया, जहाँ उन्होंने अपनी कला, परंपरा और ग्रामीण कौशल का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। इस पहल ने स्थानीय कलाकारों को पहचान और छात्रों को ग्रामीण कला-संस्कृति से जुड़ने का अवसर दिया।









