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डॉल्फ़िन संरक्षण पर एकदिवसीय कार्यशाला सम्पन्न

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डॉल्फ़िन संरक्षण पर एकदिवसीय कार्यशाला सम्पन्न

उत्कृष्ट कार्मिकों को किया गया सम्मानित

 

संवाददाता

रायबरेली।

डॉल्फ़िन बचाव एवं पुनर्वास विषय पर आधारित एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन ओम क्लार्क्स इन होटल में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। कार्यशाला का उद्देश्य डॉल्फ़िन संरक्षण, उनके सुरक्षित बचाव तथा ग्रामीण क्षेत्रों में शिकार अथवा नदी के बहाव के कारण पाए जाने की स्थिति में अपनाई जाने वाली वैज्ञानिक एवं तकनीकी प्रक्रियाओं पर व्यापक विचार- विमर्श करना रहा।

कार्यक्रम का शुभारम्भ प्रभागीय निदेशक प्रखर मिश्र, अधिशासी अभियंता (सिंचाई विभाग), उप प्रभागीय वन अधिकारी मयंक अग्रवाल, टर्टल सर्वाइवल एलायंस के निदेशक डॉ. शैलेन्द्र सिंह व डॉ. श्रीपर्णदत्ता, डॉ. आयुष पाल, विशेषज्ञ डॉ. शाहनवाज द्वारा पुष्पार्चन एवं दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। सभी विशेषज्ञों ने अपने प्रगाढ़ एवं तथ्यपरक वक्तव्यों के माध्यम से डॉल्फ़िन की पारिस्थितिक महत्ता, उनके संरक्षण की वर्तमान चुनौतियों तथा बचाव एवं पुनर्वास से जुड़े आधुनिक तकनीकी पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।

विशेषज्ञों ने बताया कि डॉल्फ़िन स्वच्छ एवं स्वस्थ नदी तंत्र की सूचक प्रजाति हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में यदि किसी कारणवश डॉल्फ़िन नदी से बाहर अथवा कमजोर अवस्था में पाई जाती है, तो तत्काल सूचना देना, सुरक्षित तरीके से उसे संभालना, प्राथमिक उपचार तथा वैज्ञानिक विधि से पुनर्वास अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने डॉल्फ़िन शिकार की घटनाओं पर प्रभावी रोक, समुदाय आधारित निगरानी व्यवस्था एवं जन-जागरूकता को संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

प्रभागीय निदेशक प्रखर मिश्र ने अपने संबोधन में कहा कि डॉल्फ़िन का संरक्षण केवल एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि यह सामूहिक दायित्व है। उन्होंने अंतरविभागीय समन्वय, स्थानीय समुदाय की सहभागिता तथा सतत निगरानी तंत्र को सुदृढ़ करने पर बल देते हुए कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएँ फील्ड स्तर के कार्मिकों की क्षमता वृद्धि में सहायक सिद्ध होती हैं। साथ ही बताया कि विशेष रूप से अपने फ्रंटलाइन स्टाफ से यह अपेक्षा करता हूँ कि आप आज यहाँ प्राप्त जानकारी को केवल प्रशिक्षण तक सीमित न रखें, बल्कि इसे गाँवों और स्थानीय समुदायों तक भी पहुँचाएँ। यदि लोगों को यह पहले से पता हो कि फँसी हुई डॉलफिन को छूना या पानी से बाहर निकालना खतरनाक होने के साथ-साथ एक दंडनीय अपराध भी है, और ऐसी स्थिति में तुरंत संबंधित विभाग को सूचना देना आवश्यक है, तो कई घटनाएँ रोकी जा सकती हैं।

कार्यक्रम का संचालन क्षेत्रीय वन अधिकारी रवि शंकर एवं जिला परियोजना अधिकारी संजय कुमार द्वारा किया गया। कार्यशाला के समापन अवसर पर क्षेत्र स्तर पर पर्यावरण संरक्षण, पौधारोपण, वन्यजीव संरक्षण एवं पौधशाला प्रबंधन के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 10 कार्मिकों को प्रभागीय निदेशक सहित मंचासीन अतिथियों द्वारा प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। अतिथियों ने सम्मानित कार्मिकों के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे समर्पित एवं अनुकरणीय प्रयास ही पर्यावरण एवं वन्यजीव संरक्षण को जमीनी स्तर पर मजबूती प्रदान करते हैं। इस अवसर पर सभी रेंज स्तर पर फील्ड कर्मचारी, जिला गंगा समिति के सदस्य जीतेन्द्र द्विवेदी एवं अन्य सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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