
जाम के झाम में जूझ रही जनता, अपने दायित्वों से पल्ला झाड़ रहे जिम्मेदार


रायबरेली।
जनपद में जाम की समस्या आए दिन विकराल रूप ले रही है जिससे जनता को रोज़ाना इस समस्या से जूझना पड़ रहा है। सड़कों पर लगने वाले जाम के कारण लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में अधिक समय गंवाना पड़ रहा है साथ ही आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। सामान्य स्थिति में अपने गंतव्यों तक पहुंचने में जितना समय लगता है, जाम की स्थिति में उसी स्थान तक पहुंचने में तीन से चार गुना अधिक समय लगता जाता है। ऐसी स्थिति में आम जनमानस को समय के साथ साथ तीन से चार गुना ईंधन की चपत लगने के कारण आर्थिक क्षति का भी सामना करना पड़ रहा है। इन विषम परिस्थितियों के उपरांत भी प्रशासन द्वारा इस सम्बन्ध में कोई ठोस कदम न उठाकर समय समय पर मात्र खानापूर्ति करके अपनी पीठ थपथपा ली जाती है।
नगर में कहीं भी उचित पार्किंग व्यवस्था न होने के कारण यह समस्या और भी बढ़ती जा रही है। नगर में बने हुए मानकविहीन बहुमंजिला भवनों में कहीं भी पार्किंग व्यवस्था नही की गई है। जबकि नियमतः ऐसे भवनों में बेसमेंट में पार्किंग व्यवस्था होनी चाहिए किन्तु विकास प्राधिकरण की मिलीभगत से बने इन भवनों के बेसमेंट क्षेत्र में भी दुकानें सजी हुई हैं जिसके चलते दुकानों में आने वाले ग्राहकों को अपने वाहन सड़कों पर खड़े करने पड़ते हैं जहां उन्हें चालान के रूप में भी आर्थिक चोट पहुंचाने का कार्य भी जारी रहता है। व्यावसायिक भवनों के अतिरिक्त भी नगर पालिका क्षेत्र में कहीं भी पार्किंग व्यवस्था न होने के कारण जनता को अपने वाहन सड़कों के किनारे खड़े करने पड़ते हैं। वहीं सड़कों पर सजी दुकानों के कारण चौड़ी सड़के भी संकरी गलियों में तब्दील हो गई हैं जिससे आए दिन जाम लगा रहता है।
इस प्रकरण पर जब रायबरेली विकास प्राधिकरण के अधिशासी अभियंता एम अहमद से बात की गई तो उन्होंने बताया कि नगर में बने 67 भवन स्वामियों को नोटिस भेज दी गई है जिसमें से कई लोगों ने कुछ समय की मोहलत मांगते हुए बेसमेंट क्षेत्र में पार्किंग रीस्टोर करने का हवाला दिया है, शेष लोगों पर कार्यवाही की जाएगी। वहीं नगर पालिका अधिशाषी अधिकारी स्वर्ण सिंह के कार्यालय में न मिलने के कारण दूरभाष पर संपर्क करने का प्रयास किया गया किन्तु उनका फोन न उठने के कारण वार्ता नही हो सकी।
अब ऐसे में सवाल यह उठता है कि जो भवन बने हुए हैं उन पर अभी तक कोई कार्यवाही क्यों नही की गई? प्राधिकरण द्वारा किन मानकों के आधार पर नक्शा पास किया गया और जो भवन बने हैं अथवा बन रहे हैं उन पर कोई कार्यवाही क्यों नही की गई?
Author: Vikas Srivastava










