
वाराणसी एवं आगरा विद्युत वितरण निगमों और उत्पादन इकाइयों के निजीकरण का निर्णय वापस ले सरकार -विजय विद्रोही

रायबरेली।
आल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन्स (ऐक्टू) के प्रदेश अध्यक्ष विजय विद्रोही ने वाराणसी और आगरा विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण के प्रदेश सरकार के निर्णय की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार सार्वजनिक संपत्तियों की संरक्षक भर है, उसे जनता की मेहनत और पसीने की कमाई से बनाई गई संपत्तियों को बेचने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
कामरेड विद्रोही ने कहा कि राज्य प्रायोजित सांप्रदायिक नफरत, हिंसा के जरिए सामाजिक विभाजन कर जनता का ध्यान दूसरी तरफ मोड़कर सरकारें देश के सार्वजनिक उपक्रमों को घाटे का बहाना बनाकर रेल, स्टील, जहाज, तेल, पानी, बिजली सहित देश की संपत्तियां चन्द अपने चहेते उद्योग पतियों को मुफ्त में भेंट कर रही हैं। घाटे का असली कारण सरकारें और इन कॉरपोरेशनों में बैठे गैर तकनीकी नौकरशाह हैं। पूरे देश के अधिकांश प्रदेशों की तुलना में उत्तर प्रदेश में जनता को दो गुना से भी ज्यादा महंगी बिजली देने के बावजूद घाटा सरकार और नौकरशाही के खेल की असलियत को उजागर करता है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2000 में घाटे से बाहर निकालने के जादुई प्रयोग के तहत विद्युत परिषद का विघटन कर दिया गया। आश्चर्य जनक है कि उस समय 77 करोड़ रूपये प्रतिवर्ष का घाटा था जो अब 25 वर्ष के बाद 01 लाख 10 हजार करोड़ बताया जा रहा है। अगर घाटे के सरकारी आंकड़ें को मान ही लिया जाय तो सरकार की तुगलकी कार्यवाही के विफल होने की जिम्मेदारी लेते हुए विघटन के पूर्व की स्थिति 25 जनवरी 2000 के समझौते के अनुसार बहाल की जानी चाहिए।किंतु सरकार को अपने चुनाव प्रबन्धन करने वाले मित्रों को उपकृत करने की जल्दी है। यह निजीकरण उसी दिशा में बढ़ा हुआ कदम है।
कॉमरेड विद्रोही ने अंत में कहा कि केंद्र सरकार वर्षों से किसान आंदोलन और बिजली कर्मचारियों तथा विभिन्न ट्रेड यूनियन महासंघों के तीखे प्रतिरोध के कारण बिजली बिल पारित नहीं कर सकी, किंतु भाजपा शासित राज्यों में विभिन्न तरीके लेकर बिजली का निजीकरण करने में तेजी दिखाई जा रही है। यह सिर्फ कर्मचारियों के लिए ही नहीं बल्कि आम जनता के लिए भयावह विभीषिका साबित होगा। इसलिए मजदूरों, कर्मचारियों, किसानों, व्यापारियों सहित समाज के सभी वर्गों को सरकार के इस मुंसियाना फैसले को वापस कराने के लिए एकजुट होकर संघर्ष करना होगा। ऐक्टू आगामी 4 दिसम्बर को राज्यव्यापी प्रतिवाद संगठित करेगा तथा बिजली कर्मचारियों के आंदोलन के साथ अपनी एकजुटता व्यक्त करते हुए इस आंदोलन को व्यापक बनाने में अपनी भूमिका निभाएगा।
Author: Vikas Srivastava










