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पुलिस और प्रशासन की सख्त कार्यवाही से आकुल वसूली गैंग

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पुलिस और प्रशासन की सख्त कार्यवाही से आकुल वसूली गैंग

पस्त होकर देख रही अपने आका के बेल आउट होने की राह

नेपाल जाते समय एयरपोर्ट पर गिरफ्तार हुआ था क्रिकेट सट्टाकिंग
गैंग की दहशत से व्यापारी नागरिकों को राहत

हरि शंकर पाराशर 

कटनी। 

कटनी माधव नगर में क्रिकेट सट्टा बादशाह विनय विरवानी और कुख्यात हिस्ट्रीसीटर राहुल बिहारी गैंग ने पूर्व पुलिस अफसर की कर सरपरस्ती में जिस तरह करोडों की वसूली, मकान जमीन से बेदखली, खून खराबा, दहशतगर्दी का तांडव मचा रखा था उस नंगे नाच पर नए पुलिस कप्तान अभिनय विश्वकर्मा और कलेक्टर दिलीप यादव की कानूनी कार्यवाहियों से ब्रेक लगा हुआ है। व्यापारी जनता अवैध वसूली के आतंक से स्वयं को मुक्त पा रही है, कानून का खोया हुआ विश्वास वापस लौटा है। विशेष रूप से राहुल अरमान पर एन एस ए की कार्यवाही और रेड कार्नर नोटिस पर एयरपोर्ट पर पकड़े गए क्रिकेट सटोरिया विनय विरवानी की गिरफ्तारी के बाद से जिले में खूनी वसूली का खेल थमा है। लेकिन वे बुकीज सटोरिए दुखी हैं जिन्हें अगस्त 25 में विनय विरवानी नेपाल के अय्याश जुआ घर में ले जाने की बुकिंग कर चुका था और इस फेर में दुबई से नेपाल जाने के लिए वीरवानी इंडिया आया और रेड नोटिस पर धर लिया गया था उस जुआ घर के लिए कटनी से भी एक दर्जन सटोरिए नेपाल के लिए आमंत्रित थे। विरवानी के हाई कोर्ट से बेल आउट होने की प्रतीक्षा अब वसूली गैंग के गुर्गे और क्रिकेट सटोरिए व्याकुलता से कर रहे हैं। राहुल बिहारी व अरमान द्विवेदी फरार हैं, उनके ऊपर एन एस ए और जिला बदर की सख्त कार्यवाही एसपी-कलेक्टर कर चुके हैं, तभी से वसूली गैंग के गुर्गों की गुंडागर्दी मंद पड़ी है। जनता चाहती है कि विरवानी से जुड़े सटोरियों तक पुलिस के हाथ पहुंच जाए तो कानून व्यवस्था में और मजबूती ताजगी आएगी।

कसीनो यूजिंग मेंजोंग नेपाल में क्रिकेट सटोरिया विनय विरवानी ने सभी सटोरिये एजेंट की रंगीन खातिरदारी और जुआ खेलने की मौज मस्ती की बुकिंग करवाई थी। चर्चा है कि सोल टी हॉटेल में सटोरियों के लिए सुइट्स अगस्त माह में बुक थे। इन्हीं सिलसिले में हाईटेक राजनीतिक संरक्षण में दुबई में फरारी काट रहा विनय नेपाल जाने के लिए अगस्त में भारत आ गया और रेड नोटिस के चलते पकड़ लिया गया। उसे सुरक्षा देने वाले प्रभावशाली नेता चाहकर भी उसकी गिरफ्तारी नहीं रोक पाए। नागरिकों का कहना है कि क्रिकेट सट्टे के स्थानीय बुकीज के गिरेबान तक कानून के हाथ पहुंच जाएं तो दहशत को स्थाई रूप से समाप्त किया जा सकता है।

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