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सर्वश्रेष्ठ बाल शल्य चिकित्सा जागरूकता सप्ताह आयोजन हेतु एम्स रायबरेली को मिला राष्ट्रीय सम्मान

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सर्वश्रेष्ठ बाल शल्य चिकित्सा जागरूकता सप्ताह आयोजन हेतु एम्स रायबरेली को मिला राष्ट्रीय सम्मान

 

रायबरेली।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) रायबरेली को प्रतिष्ठित भारतीय बाल शल्य चिकित्सक संघ (IAPS) द्वारा पुरी, उड़ीसा में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में “सर्वश्रेष्ठ बाल शल्य चिकित्सा जागरूकता सप्ताह” पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह सम्मेलन संघ की हीरक जयंती (60वीं वर्षगांठ) के उपलक्ष में आयोजित किया गया था।

बताते चलें कि भारतीय बाल शल्य चिकित्सक संघ की स्थापना वर्ष 1960 में हुई थी। यह संगठन नवजात शिशुओं, बच्चों और किशोरों में जन्मजात विकृतियों, चोट, ट्यूमर तथा अन्य जटिल शल्य रोगों के उपचार, अनुसंधान और प्रशिक्षण में समर्पित है। IAPS की राष्ट्रीय पहल के अंतर्गत एम्स रायबरेली के बाल शल्य विभाग ने 2 से 8 जून, 2025 तक बाल शल्य चिकित्सा जागरूकता सप्ताह का आयोजन किया था। इसका उद्देश्य जनसामान्य में बाल शल्य चिकित्सा के महत्व और जन्मजात विकृतियों के उपचार की आधुनिक तकनीकों के प्रति जागरूकता फैलाना था। इस अभियान का नेतृत्व अपर प्रोफेसर डॉ. सुनीता सिंह (विभागाध्यक्षा) ने किया था। उनके साथ डॉ. उमेश गुप्ता, डॉ. दिव्य प्रकाश तथा विभाग के नर्सिंग अधिकारियों ने सक्रिय रूप से प्रतिभाग किया था। साथ ही लगभग 70 एमबीबीएस छात्रों ने ऑनलाइन निबंध प्रतियोगिता में प्रतिभाग किया था। इसके अलावा, स्त्री एवं प्रसूति, सर्जरी और बाल रोग विभागों के लगभग 20 स्नातकोत्तर छात्रों ने पीजी क्विज़ प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग किया था।

ज्ञात हो कि एम्स रायबरेली के बाल शल्य चिकित्सा विभाग की स्थापना वर्ष 2020 में हुई थी। पिछले पाँच वर्षों में इस विभाग ने लगभग 1000 बच्चों का सफल उपचार किया। विभाग में बाल मूत्ररोग और हाइपोस्पेडियास क्लिनिक जैसे विशेष क्लिनिक भी संचालित हैं जहाँ गुर्दे, मूत्राशय, जननांग विकृति, अंडकोष न उतरना और हर्निया जैसी समस्याओं का इलाज किया जाता है। आउटडोर (ओपीडी) क्लिनिक प्रतिदिन कक्ष संख्या 155 और 156 में संचालित होती है, जहाँ बच्चों को नियमित परामर्श और जांच की सुविधा दी जाती है। विभाग में लैप्रोस्कोपी और सिस्टोस्कोपी जैसी आधुनिक तकनीकों से मिनिमल इनवेसिव सर्जरी की जाती है, जिससे बच्चों को कम दर्द होता है और वे जल्दी स्वस्थ हो जाते हैं। हाल ही में, यूरोडायनेमिक प्रयोगशाला की सुविधा भी शुरू की गई है, जहाँ मूत्र असंयम (पेशाब पर अनियंत्रण) से पीड़ित बच्चों की जांच और उपचार किया जाता है। यह नई सुविधा ऐसे मामलों के बेहतर निदान और उपचार में मदद करेगी। एम्स रायबरेली का बाल शल्य चिकित्सा विभाग पूरे क्षेत्र के नवजात शिशुओं, शिशुओं और बच्चों को उन्नत और संवेदनशील शल्य चिकित्सा देखभाल प्रदान करता रहेगा।

संस्थान की कार्यकारी निदेशक प्रो. (डॉ.) अमिता जैन ने इस राष्ट्रीय उपलब्धि पर बाल शल्य चिकित्सा विभाग एवं स्नातक तथा स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को हार्दिक शुभकामनाएँ एवं बधाई दी और कहा कि यह पुरस्कार संस्थान की उत्कृष्ट चिकित्सा सेवा, शिक्षण और सामाजिक जागरूकता के प्रति समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने विभाग को बेहतर बाल चिकित्सा देखभाल हेतु निरंतर प्रयास जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया। यह उपलब्धि एम्स रायबरेली के लिए गर्व का विषय है और बाल शल्य चिकित्सा के क्षेत्र में इसके निरंतर योगदान का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि यदि समय पर और प्रशिक्षित बाल शल्य चिकित्सक द्वारा उपचार किया जाए, तो जन्मजात विकृतियों वाले बच्चे सामान्य, स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।

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