
आंगनबाड़ी संयुक्त मोर्चा का विशाल धरना, १० सूत्रीय मांगों को लेकर सौंपा ज्ञापन

संवाददाता
रायबरेली।
आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों, सहायिकाओं की लंबित एवं न्यायोचित मांगों को लेकर आंगनबाड़ी संयुक्त मोर्चा (उ.प्र.) के आह्वान पर विकास भवन प्रांगण में एक दिवसीय विशाल धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया।
धरने में जनपद के सभी विकास खंडों से लगभग 2000 से अधिक आंगनबाड़ी कार्यकत्री एवं सहायिकाएं उपस्थित रहीं। धरना-प्रदर्शन के दौरान मंच से तीनों संगठनों के सभी जिला अध्यक्षों एवं जिला संरक्षकों ने क्रमवार संबोधन किया। वक्ताओं ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की सेवा-परिस्थितियों, मानदेय, सामाजिक सुरक्षा, सम्मान एवं भविष्य की अनिश्चितता पर विस्तार से अपनी-अपनी बातें रखीं तथा सरकार से शीघ्र निर्णय लेने की मांग की।

मुख्य रूप से अनुप कुमार मिश्र (जिला संरक्षक), विक्रम सिंह (जिला संरक्षक), राकेश कुमार शुक्ल, मंजू सिंह (जिला अध्यक्ष), बीना सिंह (जिला अध्यक्ष), लीना त्रिपाठी (जिला अध्यक्ष), राज सुंदरी (वरिष्ठ उपाध्यक्ष), स्नेहा सिंह (जिला मंत्री), सुनीता त्रिपाठी (जिला मंत्री) सहित अन्य पदाधिकारियों ने मंच से संबोधित करते हुए कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकत्री सरकार की सबसे मजबूत जमीनी कड़ी हैं, फिर भी उन्हें आज तक स्थायी कर्मचारी का दर्जा एवं सामाजिक सुरक्षा नहीं मिल सकी है।
वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि पूर्णकालिक कर्मचारी का दर्जा, वेतनमान, पेंशन एवं ग्रेच्युटी, 65 वर्ष सेवानिवृत्ति आयु, नियमित पदोन्नति, पोषण ट्रैकर हेतु मोबाइल व डाटा भत्ता, पी एल आई राशि को मानदेय में शामिल करना, केंद्रों की मूलभूत सुविधाएं अब केवल मांग नहीं बल्कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का अधिकार है। धरने के उपरांत आंगनबाड़ी संयुक्त मोर्चा एवं तीनों संगठनों के प्रतिनिधिमंडल द्वारा मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार एवं प्रधानमंत्री भारत सरकार के नाम 10 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी को सौंपा गया।
आंदोलनकारियों ने प्रशासन को अवगत कराया कि यदि 7 मार्च 2026 तक सरकार द्वारा कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो 8 मार्च 2026 से प्रदेश के सभी जनपदों में एक साथ विशाल धरना-प्रदर्शन किया जाएगा, जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। यह धरना पूरी तरह शांतिपूर्ण, अनुशासित एवं संगठित रहा। अंत में आंगनबाड़ी बहनों ने सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने का संकल्प दोहराया।
Author: Vikas Srivastava










