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अपने दायित्वों से पल्ला झाड़ रहे सीडीपीओ, प्रमुख सचिव से बात करने की दी नसीहत 

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अपने दायित्वों से पल्ला झाड़ रहे सीडीपीओ, प्रमुख सचिव से बात करने की दी नसीहत 

 

रायबरेली।

शासन द्वारा जनहित हेतु अधिकारियों को आए दिन निर्देश जारी किए जाते हैं। किन्तु जनपद के कुछ अधिकारियों व कर्मचारियों अपने पद के मद में इस कदर चूर रहते हैं कि उन्हें अपने दायित्वों का निर्वहन करने से ही परहेज होने लगता है। जब पत्रकारों द्वारा उन प्रकरणों को लेकर जानकारी लेने का प्रयास किया जाता है तो वह उन्हें नसीहत देने से पीछे नही हटते।

ज्ञात हो कि भारत सरकार के निर्देशानुसार समस्त आंगनवाड़ी केंद्रों में पुष्टाहार वितरण में पारदर्शिता लाने हेतु ई-केवाईसी करवाई जा रही है। यह ई-केवाईसी कार्य हेतु जनवरी 2025 से प्रशिक्षण करवाया जा रहा है, जिसकी अंतिम तिथि 30 जून 2025 तक निर्धारित की गई है।

सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार जनपद के छतोह विकास खण्ड अंतर्गत आंगनवाड़ी केंद्रों पर बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग द्वारा अब तक कोई प्रशिक्षण नही कराया गया है। आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों का आरोप है कि सीडीपीओ छतोह ने 5 माह तक इसकी जानकारी नही दी और मास्टर ट्रेनर द्वारा कोई प्रशिक्षण नही दिया गया है और नेट का पैसा भी नही दिया गया तथा आंगनवाड़ी का मोबाइल भी खराब है। बिना प्रशिक्षण के ही सभी को जबरन कार्य करने का फरमान सुना दिया गया।

इस संबंध में वास्तविकता जानने हेतु जब सीडीपीओ छतोह से बात की गई तो साहब ने बड़े ही रोबीले अंदाज में परिचय बताए जाने के बावजूद पता पूछते हुए प्रमुख सचिव से बात करने की सलाह देते हुए कहा कि वह ही इसका सबसे बेहतर जवाब देंगे और आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों को ही कामचोर और मक्कार घोषित कर दिया। साथ ही यह भी कहा कि सबको रात में जगा जगा कर ट्रेनिंग दे रहा हूं।

अब ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब बात प्रमुख सचिव से ही करनी तो सीडीपीओ साहब का आखिर क्या दायित्व है और उन्हें किस बात का वेतन दिया जा रहा है? इसके अलावा यदि सब कार्य ठीक से चल रहा है तो रात में जगा कर प्रशिक्षण देने की क्या आवश्यकता पड़ गई? फिलहाल कारण जो भी हो वह जांच का विषय है किन्तु सीडीपीओ छतोह के अंदाज यही बयां करता है कि प्रमुख सचिव का वरदहस्त उनको संरक्षण दे रहा है।

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