
जिम्मेदारों के संरक्षण में चल रहा हरियाली पर आरा
मीडिया की खबरों से खुलती अधिकारियों की लॉटरी

रायबरेली।
देश में जहां एक तरफ पर्यावरण को सुरक्षित रखने हेतु तरह तरह के अभियान चलाए जाते हैं। समय समय पर वृक्षारोपण अभियान चलाया जाता है और संबंधित विभागों को अवैध काटने को लेकर कड़ी कार्यवाही हेतु निर्देशित किया जाता रहा है तो वहीं दूसरी तरफ पर्यावरण की रक्षा के लिए तैनात कर्मचारी अपने निजी स्वार्थ के लिए पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने में तनिक भी पीछे नहीं हटते। जनपद में विभिन्न स्थानों पर आए दिन अवैध कटान के मामले सामने आते रहे हैं, नगर क्षेत्र समेत अनेक स्थानों पर कोयले की भट्ठियां धधकती रहती हैं, जो न तो स्थानीय पुलिस को दिखाई देती हैं और न ही विभागीय कर्मचारियों को। जिम्मेदारों द्वारा इन पर कोई भी ठोस कार्यवाही नही की जाती और यदि की भी जाती है तो कार्यवाही के नाम पर मात्र खानापूर्ति करके अपनी जेब भरने का काम बखूबी किया जाता रहा है।
ऐसे मामलों में जब मीडिया कर्मियों द्वारा कवरेज करने का प्रयास किया जाता है तो कटान ठेकेदार द्वारा मीडिया कर्मियों से अभद्रता एवं मारपीट के मामले भी सामने आते रहते हैं। इतना ही नही अधिकारियों को सूचना देने पर शासनादेश के विपरीत मीडियाकर्मियों से अभद्रता करना इन अधिकारियों की कार्यशैली का हिस्सा बन चुका है और सूचना को संज्ञान में लेकर दोषियों पर कार्यवाही करने के बजाय संबंधित अधिकारियों द्वारा अपने क्षेत्र में जाकर ठेकेदारों से भारी भरकम रकम लेकर पर्यावरण को भगवान भरोसे छोड़ दिया जाता है जिससे ठेकेदार निर्भीक होकर धड़ल्ले से हरियाली पर आरा चलाते रहते हैं।
ज्ञात हो कि नगर क्षेत्र अंतर्गत त्रिपुला से जहानाबाद चौकी के मध्य प्रतिदिन भारी मात्रा में हरे वृक्षों को काटकर लादे ट्रैक्टर ट्राला फर्राटा भरते रहते हैं और रायपुर व आसपास स्थित गोदामों में लकड़ी का भंडारण किया जाता है। विगत कई दिनों से उक्त मामले की जानकारी स्थानीय वन दरोगा संजय सिंह समेत क्षेत्रीय वन अधिकारी अशोक कुमार श्रीवास्तव को दी गई किन्तु उनके द्वारा आज तक कोई कार्यवाही नही की गई। दो दिन पूर्व क्षेत्रीय वन अधिकारी को ऐसे ही एक मामले की जानकारी दी गई जिसको लेकर उन्होंने कहा,”मैं वहीं हूं, एक प्लॉट में महुआ कटा है, तुम लोग फालतू परेशान हो।”
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार एक अन्य मामले में संबंधित अधिकारी को सूचना देने के बाद एक कर्मचारी द्वारा मौके पर जाकर ठेकेदार से 4000 रुपए लेकर छोड़ दिया गया। ऐसे में यह स्पष्ट है कि मीडियाकर्मियों द्वारा दी गई सूचना पर अधिकारियों की लॉटरी लग जाती है और उन्हें अपनी जेब भरने का अवसर मिल जाता है।

ऐसे ही मामलों को लेकर जब प्रभागीय निदेशक प्रखर मिश्र फ़ोन किया गया तो उनके द्वारा फोन नही उठाया गया और जब कार्यकाल जाकर भेंट करने का प्रयास किया गया तो वह कार्यालय में भी नही मिले।
Author: Vikas Srivastava










