सार्वजनिक वितरण प्रणाली अंतर्गत कोटेदार जबरन बेंच रहे अन्य सामान

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सार्वजनिक वितरण प्रणाली अंतर्गत कोटेदार जबरन बेंच रहे अन्य सामान

 

रायबरेली।

सार्वजनिक वितरण प्रणाली अंतर्गत खाद्यान्न वितरण में घट तौली, कालाबाजारी व तमाम अनियमिताओं को रोकने एवं पात्र लाभार्थियों को मुफ़्त खाद्यान्न उपलब्ध कराने हेतु सरकार द्वारा नित नए शिकंजे कसे जा रहे हैं। किन्तु कोटेदारों की मनमानी कार्यशैली एवं जिम्मेदारों की मिलीभगत से सरकार के प्रयासों पर पानी फेरा जाता रहता है। इतना ही नही गरीबों का हक मारने और उनकी जेब पर डाका डालने हेतु कोटेदारों द्वारा सरकारी राशन में घटतौली के साथ साथ अन्य घरेलू सामानों भी जबरन बिक्री भी की जा रही है। हालांकि आम जनमानस के हितों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार द्वारा खाद्यान्न के साथ साथ वितरण प्रणाली में ३६ अन्य गृहउपयोगी वस्तुओं को भी जोड़ा गया है। जिसकी मूल्य सूची भी कोटे पर चस्पा की जानी चाहिए, जिससे लाभार्थियों को बाज़ार मूल्य से कम मूल्य पर आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति की जा सके।

 

प्राप्त जानकारी अनुसार जनपद की सलोन तहसील अंतर्गत बेतौरा ग्राम सभा की कोटेदार द्वारा समस्त नियमों को दरकिनार कर खाद्यान्न लेने आए समस्त लाभार्थियों से ₹50 लेकर 3 साबुन और 1 मग जबरन बेंचा जा रहा है और न लेने पर अगले माह से राशन न मिलने की बात कही जा रही है। एक लाभार्थी द्वारा मूल्य सूची के बारे में पूंछा गया तो खाद्यान्न वितरण कर रहे कोटेदार के पति श्रीनाथ गुप्ता ने कहा कि मूल्य सूची अभी आई नही है। स्थानीय निवासियों ने बताया कि इसके बाद कोटेदार पति ने लाठी लेकर धमकाते हुए कहा कि अब वितरण नही होगा।

इस संबंध में जिला पूर्ति अधिकारी उबैदुर रहमान ने बताया कि हमारे यहां से ऐसी कोई व्यवस्था नही है। राज्य सरकार द्वारा खाद्यान्न के साथ साथ वितरण प्रणाली में कुछ गृहउपयोगी वस्तुओं को भी जोड़ा गया है जिसकी मूल्य सूची प्रदर्शित की जानी अनिवार्य है।सूचना पर जिला पूर्ति अधिकारी द्वारा क्षेत्रीय आपूर्ति निरीक्षक को उक्त प्रकरण की जांच हेतु निर्देशित किया गया।

वहीं स्थानीय निवासियों की मानें तो कई बार शिकायतों के बाद भी पूर्ति निरीक्षक सूर्यकांत चौरसिया द्वारा कोई ठोस कार्यवाही नही की गई और न ही उनके द्वारा फ़ोन उठाया जाता है। जिससे कोटेदारों के हौंसले बुलंद होते जा रहे हैं और उनकी मनमानियां बढ़ती जा रहीं हैं। ऐसे में क्षेत्रीय आपूर्ति निरीक्षक की भूमिका भी संदिग्ध प्रतीत होती है। जब भी क्षेत्रीय आपूर्ति निरीक्षक सूर्यकांत चौरसिया को फ़ोन किया जाता है तो उनके द्वारा फोन न उठाना और थोड़ी देर बाद कोटेदार का फ़ोन आना साठगांठ का स्पष्ट संकेत देता है।

Vikas Varta
Author: Vikas Varta

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