Search
Close this search box.

रात दिन पसीना बहाने वाले भूखे पेट सोने को विवश :गीता मिश्रा 

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

रात दिन पसीना बहाने वाले भूखे पेट सोने को विवश :गीता मिश्रा 

 

रायबरेली।

आल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस (ऐक्टू) के राज्यव्यापी आह्वान के तहत बड़ी संख्या में लोगों ने विकास भवन परिसर में धरना दिया। धरने के उपरांत प्रदर्शन कारियों ने जिलाधिकारी कार्यालय तक जुलूस निकालकर जोरदार प्रदर्शन करते हुए अपनी मांगो के समर्थन में आवाज बुलन्द की गई।

आशा वर्कर्स यूनियन की जिलाध्यक्ष गीता मिश्रा ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज मेहनतकश हिस्से के सामने जीवित रहने की भी स्थिति नहीं बची है। स्कीम वर्कर्स के नाम पर आशा, मिड डे मील वर्कर्स, जीविका कैडर सहित दर्जनों मुफ्त की महिला कामगारों को जानलेवा काम के बोझ के नीचे दबा कर उनके श्रम और क्षमता की लूट जारी है। एक दशक से अधिक समय से अनवरत सेवारत आशा और मिड डे वर्कर्स आज भी दो हजार रुपए में महीने भर खटने के लिए विवश हैं । सरकारें जिस विकास की बड़ी बड़ी बातें करती हैं उसकी असलियत रातों दिन पसीना बहाने के बावजूद भूखे पेट सोने को मजबूर किसी मजदूर की जिंदगी में झांक कर सहज ही देखा जा सकता है।

मिड डे मील वर्कर्स यूनियन की जिलाध्यक्ष सरस्वती ने कहा की 2013 में हुए भारतीय श्रम सम्मेलन ने आशा, मिड डे मील और आंगनवाड़ी वर्कर्स को स्थाई कर्मचारी का दर्जा देकर न्यूनतम वेतन दिए जाने ईएसआई, ईपीएफ, ग्रेच्युटी और मातृत्व अवकाश दिए जाने की सिफारिश की थी। किंतु पिछले 16 वर्षों से वह रिपोर्ट धूल फांक रही है और यह तीनों कामगार बेगार में अपना जीवन खपा रहे हैं। ग्रामीण एवं खेत मजदूर सभा के जिला संयोजक राजेश कुमार के कहा की मनरेगा में जिले के भीतर 40 करोड़ से अधिक की मजदूरी बकाया है। सरकारी इशारे पर नौकरशाही ने 1 लाख से अधिक श्रमिकों को सूची से साजिश कर हटा दिया। जबकि आधार से जॉब कार्ड को लिंक करने की कोई सार्वजनिक सूचना पंचायत घरों में चस्पा नहीं की गई और न ही मुनादी कराई गई। उन्होंने आगे कहा कि मोदी जी ने लखपति दीदी बनाते बनाते समूह और माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के कर्ज के ऐसे जाल में सारी गरीब महिलाओं को फंसा दिया कि लोग घर द्वार बेचकर पलायन के लिए मजबूर हैं।

ऐक्टू जिला सचिव राम गोपाल ने कहा कि एनटीपीसी और रेल कोच फैक्ट्री में ठेका मजदूरों द्वारा अर्जित मजदूरी का आधा हिस्सा ठेकेदार जबरन छीन लेते हैं और आश्चर्य यह है कि इसके विरुद्ध मजदूर लगातार संघर्ष कर रहे हैं, किंतु प्रशासन ने चुप्पी साध रखी है। आशा कर्मियों के करोड़ों रुपए हेर फेर कर लिए जाते हैं और उनके बाउचर स्वीकृत करने के नाम पर सालाना 2 करोड़ की वसूली कर ली जाती है। आशा कर्मी चीख चीख कर थक गईं किंतु जिला स्वास्थ्य समिति और सरकार किसी ने सुनने की जहमत नहीं उठाई। उन्होंने कहा कि रायबरेली श्रम विभाग में कुछ भ्रष्ट कर्मचारियों को अधिकारी लंबे समय से एक ही पटल पर बैठाए हुए हैं और उन्हीं के जरिए लूट का कारोबार चलाया जा रहा है। ऐक्टू स्कीम वर्कर्स, औद्योगिक मजदूरों, असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के अधिकारों और सम्मान के लिए संघर्षरत है। यदि जिला प्रशासन और जिम्मेदारों ने मेहनतकशों के सवालों को अनसुना करने की कोशिश की तो बड़े आंदोलनों का सामना करना पड़ेगा।

तत्पश्चात आशा मिड डे मील वर्कर्स के वित्तीय वर्ष 2024-25 के सभी बकाया देयों के भुगतान को सुनिश्चित करने, एनटीपीसी और रेल कोच के संविदा श्रमिकों से हो रही अवैध वसूली रोके जाने, मनरेगा मजदूरों को आधार से जॉब कार्ड लिंक कर सक्रिय सूची में जोड़ने और बकाया मजदूरी का भुगतान किए जाने तथा माइक्रो फाइनेंस कंपनियों की मनमानी पर रोक लगाने आदि मांगो से संबंधित ज्ञापन सक्षम अधिकारी को सौंपे गए। प्रदर्शन में मिड डे मील वर्कर्स यूनियन की सचिव विद्या, ऐक्टू कार्यवाहक अध्यक्ष मो अंसार, उपाध्यक्ष कृष्ण आत्मा शर्मा, ऐपवा संयोजक आलिया, सहसंयोजक गायत्री, इंकलाबी नौजवान सभा अध्यक्ष हनुमान अम्बेडकर, उपाध्यक्ष गुलाम अहमद सिद्दीकी, भाकपा (माले) जिला सचिव उदय पटेल, किसान महासभा के जिला सचिव इंद्र बहादुर सिंह सहित अन्य लोगों ने प्रतिभाग किया।

Leave a Comment

और पढ़ें