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जनता को खुद लड़नी होगी प्राथमिक विद्यालयों को बचाने की लड़ाई: विजय विद्रोही 

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जनता को खुद लड़नी होगी प्राथमिक विद्यालयों को बचाने की लड़ाई: विजय विद्रोही 

 

रायबरेली।

उच्च न्यायालय के निर्णय पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए भाकपा (माले) राज्य स्थाई समिति के सदस्य विजय विद्रोही ने कहा कि प्राथमिक विद्यालयों को बचाने की लड़ाई जनता को खुद लड़नी होगी। शैक्षिक क्षेत्र में इतनी बड़ी तबाही की सरकार ने आंकड़ेबाजी के साथ वर्षों तैयारी की है। इसका मुकाबला व्यापक जनप्रतिरोध से सरकार की साजिश का पर्दाफाश करते हुए किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि बच्चों के कम पंजीकरण के लिए विद्यालयों की दुर्दशा और कुप्रबंधन प्रमुख हैं। सरकार प्राथमिक विद्यालयों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में विफल रही है। इस शर्मनाक स्थिति के लिए सरकार जिम्मेदारी लेने के बजाय तरह तरह के तर्क गढ़ रही है।

कॉमरेड विद्रोही ने कहा कि सरकार को शायद यह याद नहीं है कि कोविड के बाद जैसे ही विद्यालय खुले तो इन्हीं विद्यालयों में बच्चों के बैठने के लिए जमीन कम पड़ गई थी और दूसरी ओर उच्च न्यायालय, उच्चतम न्यायालय के बार बार निर्देश देने के बावजूद किसी भी निजी स्कूल से बंदी के समय की फीस सरकार द्वारा माफ नहीं कराई जा सकी।

उन्होंने कहा कि किसी भी लाखों रुपया वार्षिक फीस लेने वाले निजी स्कूल के मुकाबले हजार गुना योग्यतम शिक्षकों के बावजूद संख्या में गिरावट के कारणों का अध्ययन करना चाहिए था, किंतु सरकार द्वारा अपार और पेन जैसी आई डी सृजित करवाकर एक ऐसा चक्रव्यूह तैयार किया जिसमें गरीब परिवारों का गांव से रोटी रोजी के लिए होने वाले पलायन और वापसी में बच्चों का पुन: प्रवेश रोक दिया गया। साथ ही 6 वर्ष की बाध्यता ने भी संख्या को बुरी तरह प्रभावित किया। ड्रेस के पैसे का सीधे खाते में स्थानांतरण का निर्णय भी परिजनों को भारी पड़ा, आधार कार्ड में छोटी छोटी वर्णनात्मक त्रुटियों के कारण उनके भुगतान फंस गए, परिजन कार्यालयों के चक्कर लगाते रहते है। प्राथमिक विद्यालय किसी भी दशा में बन्द नहीं होने दिए जाएंगे। यह लड़ाई सरकार द्वारा बंदी कथित मर्जर के आदेश को वापस लेने तथा विद्यालयों के बुनियादी ढांचों को सुदृढ़ कर प्रतिस्पर्धा लायक बनाने तक जारी रहेगी। जनता की मूलभूत बुनियादी जरूरतों के खात्मे का अधिकार किसी भी सरकार और संस्था को नहीं है।

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