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पीएम आवास योजना का काला अध्याय: बिना बिजली-पानी के घरों में धरना

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पीएम आवास योजना का काला अध्याय: बिना बिजली-पानी के घरों में धरना

क्षतिग्रस्त इमारतें बनीं गरीबों से छलावा

 

हरि शंकर पाराशर

कटनी।

केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई), जो गरीबों को पक्के मकान का सपना दिखाती है, कटनी जिले के एनकेजी उप नगरीय क्षेत्र, एनकेजी थाना के पास में एक क्रूर मजाक बनकर रह गई है। नगर निगम द्वारा निर्मित और आवंटित बहुमंजिला आवासीय इमारतों में रहने वाले सैकड़ों परिवार बुनियादी सुविधाओं यथा बिजली, पानी और गुणवत्तापूर्ण निर्माण के अभाव में सड़कों पर उतर आए हैं। क्षतिग्रस्त दीवारें, टपकती छतें और घटिया निर्माण सामग्री ने इस योजना को न केवल विफल साबित किया, बल्कि इसे गरीबों के साथ छलावे का प्रतीक बना दिया है।

स्थानीय निवासियों का आक्रोश

प्रभावित परिवारों का कहना है कि उन्हें घर तो दे दिए गए, लेकिन ये रहने लायक नहीं हैं। एक महिला लाभार्थी ने गुस्से में कहा,”बड़े-बड़े होर्डिंग्स और वादों के साथ योजना की तारीफ होती है, लेकिन हकीकत यह है कि हम अंधेरे में रहने और प्यासे मरने को मजबूर हैं।” धरना दे रहे लोगों ने आरोप लगाया कि निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल हुआ, जिससे कई इमारतें अब ढहने की कगार पर हैं। एक स्थानीय सर्वे के अनुसार, इन बहुमंजिला भवनों के 70% से अधिक फ्लैट्स में बिजली कनेक्शन नहीं हैं और जल आपूर्ति लगभग न के बराबर है।

योजना की व्यापक विफलता

यह समस्या केवल कटनी तक सीमित नहीं है। पूरे देश में पीएमएवाई की कमियां उजागर हो रही हैं। लाखों करोड़ रुपये के बजट के बावजूद, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। विपक्षी दलों ने इसे “गरीबों के साथ धोखा” करार दिया है, जबकि कटनी जैसे छोटे शहरों में यह योजना ठेकेदारों और अधिकारियों की मिलीभगत से “लूट का अड्डा” बन गई है।

नगर निगम का रवैया और भविष्य की आशंका

नगर निगम प्रशासन ने समस्या को हल्के में लेते हुए दावा किया कि शीघ्र समाधान किया जाएगा, लेकिन प्रदर्शनकारी अब न्यायालय का रुख करने की तैयारी में हैं। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यदि समय रहते सुधार नहीं हुए, तो यह योजना अपनी विश्वसनीयता खो देगी और गरीबों में असंतोष को और भड़काएगी।

कटनी का सबक

एनकेजी उप नगरीय क्षेत्र में पीएमएवाई की यह दुर्दशा देश के लिए एक चेतावनी है। कागजी घोषणाओं और दिखावटी वादों से आगे बढ़कर वास्तविक कल्याण पर ध्यान देना होगा। गरीबों के सपनों को साकार करने के लिए ठोस कदम और पारदर्शी कार्यान्वयन जरूरी है, वरना यह योजना केवल एक राजनीतिक छलावा बनकर रह जाएगी।

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