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शहरी गरीबों को आजीविका का साधन दिलाने के लिये 9318 स्वसहायता समूहों का गठन

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शहरी गरीबों को आजीविका का साधन दिलाने के लिये 9318 स्वसहायता समूहों का गठन

3581 स्वसहायता समूहों का बैंक लिंकेज कर 81 करोड़ रूपये का वितरण

हरि शंकर पाराशर 

कटनी।

प्रदेश में शहरी क्षेत्रों के गरीबों को आजीविका के साधन उपलब्ध कराने के लिये नगरीय निकाय बैंकों के साथ मिलकर स्व-सहायता समूहों को आर्थिक सहायता उपलब्ध करा रहे हैं। अब तक प्रदेश में शहरी क्षेत्रों में 9318 स्व-सहायता समूहों का गठन कर 9000 से अधिक शहरी गरीब परिवारों को स्व-सहायता समूहों से जोड़ा गया है। इसके साथ ही स्व-सहायता समूह को आर्थिक रूप से मजबूती देने के लिये 642 एरिया लेवल फेडरेशन का गठन और 34 सिटी लेवल फेडरेशन का गठन किया गया है।

नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने 6720 स्व-सहायता समूहों को आवर्ती निधि राशि के रूप में करीब 6 करोड़ 75 लाख रूपये की राशि प्रदाय की है। स्वरोजगार कार्यक्रम अंतर्गत पूर्व से स्वीकृत व्यक्तिगण ऋण में 5723 हितग्राहियों को लगभग 77 करोड़ रूपये और समूहगत ऋण के रूप में 396 स्व-सहायता समूहों को 11 करोड़ रूपये मंजूर किये हैं। प्रदेश में शहरी क्षेत्र के 3581 स्व-सहायता समूहों का बैंक लिंकेज कर 21 करोड़ 50 लाख रूपये का ऋण बैंकों के माध्यम से वितरित किया गया है।

स्व-सहायता समूह योजनाओं में भी कर रहे मदद

शहरी स्व-सहायता समूहों को नगरीय विकास विभाग और अन्य केन्द्रीय योजनाएं जिनमें अमृत 2.0 में अमृत मित्र के रूप में जोड़ा गया है। स्व-सहायता समूह के सदस्य जल गुणवत्ता परीक्षण कार्य, स्वच्छता जागरूकता कार्यक्रम, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट और सेनीटेशन जैसी गतिविधियों में भी मदद कर रहे हैं। अमृत 2.0 योजना में अमृत मित्र कार्यक्रम के अंतर्गत 10 नगरीय निकाय जबलपुर, भोपाल, इंदौर, नर्मदापुरम, छतरपुर, ग्वायिर, रीवा, छिंदवाड़ा, धार और देवास में 20 स्व-सहायता समूहों को 56 लाख रूपये के कार्यादेश दिये गये हैं। दूसरे चरण में प्रदेश के 45 निकायों का चयन किया जा चुका है। इन महिला स्व-सहायता समूहों को जल गुणवत्ता परीक्षण और सार्वजनिक पार्क संचालन और संधारण की जिम्मेदारी का कार्य सौंपा गया है। स्वच्छ भारत मिशन में 166 स्वसहायता समूह सेनिटेशन और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट कार्य से जुड़े हुए हैं।

उद्यानिकी विभाग की योजना से भी जुड़े स्व-सहायता समूह

प्रदेश में शहरी स्व-सहायता समूहों को केन्द्र सरकार की उद्यानिकी विभाग की योजना प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम योजना (पीएमएफएएमई) से भी जोड़ा गया है। योजना में सीड कैपिटल घटक में 126 स्व-सहायता समूह के 708 सदस्यों को एरिया लेवल फेडरेशन के माध्यम से 3 करोड़ रूपये खाद्य प्र-संस्करण संबंधी गतिविधियों के लिये दिये जा चुके हैं। नगरीय निकायों ने इसी योजना में दूसरे चरण में 103 स्व-सहायता समूहों के 600 सदस्यों को फेडरेशन के माध्यम से उद्यानिकी गतिविधियों के लिये करीब 2 करोड़ रूपये राशि के प्रस्ताव स्वीकृति के लिये भेजे हैं। शहरी क्षेत्रों में स्व-सहायता समूहों को खाद्य प्र-संस्करण से संबंधित गतिविधियों का लगातार प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके साथ ही इन समूहों में शहरी क्षेत्र की महिलाओं को अधिक से अधिक जोड़ने के प्रयास किये जा रहे हैं।

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