कार्यालय से नदारत अधिकारी, कौन सुनेगा किसानों की फरियाद
दिन सोमवार, समय दोपहर 12 से 12:30, कार्यालय में खाली पड़ीं कुर्सियां कह रहीं हकीकत की कहानी

रायबरेली।

सरकार भले ही सरकारी विभागों की कार्यशैली में सुधार और पारदर्शिता लाने हेतु लाख प्रयासरत हो किन्तु जमीनी स्तर पर सरकार के मंसूबे तार तार ही होते हैं।

दिन सोमवार, समय दोपहर 12 से 12:30 बजे, सिंचाई विभाग कार्यालय में खाली पड़ीं कुर्सियां चीख चीख कर इस कार्यालय की स्थितियां बयां कर रहीं हैं। ज्ञात हो कि जनपद में नहरों की सफाई को लेकर तमाम अनियमितताएं प्रकाश में आई हैं जिसके चलते विभागीय कार्यशैली पर सवाल खड़े हो गए हैं। उक्त प्रकरण में जानकारी करने हेतु संवाददाता द्वारा अधिकारियों से बातचीत करने का प्रयास किया गया। कार्यालय पहुंच कर स्थितियां अलग ही नजर आईं। कार्यालय में अधिशासी अभियंता राम विलास यादव समेत कोई भी अधिकारी उपस्थित नही मिला और जब अधिकारी ही कार्यालय में उपस्थित न हों तो अधीनस्थ कर्मचारियों का न मिलना स्वाभाविक ही है क्योंकि जिसका डर है जब वही गायब हो तो आखिर डर किसका? साहब सब संभाल ही लेंगे। हालांकि अधिशासी अभियंता राम विलास यादव के कक्ष के बाहर लगी पट्टिका पर मिलने का समय 9 से 11 व कृषकों से हर समय लिखा है किन्तु जब अधिकारी कार्यालय में उपस्थित नही होंगे तो आख़िर आगंतुक किससे मिलेंगे यह अपने आप में एक जटिल प्रश्न है।
कार्यालय में उपस्थित कर्मचारियों से जानकारी करने पर ज्ञात हुआ कि कोई अवकाश पर है तो कोई अनुपस्थित और कोई क्षेत्र पर गया है। अब ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या विभाग के समस्त कर्मचारी एक साथ क्षेत्र पर चले जाते हैं और यदि इसमें वास्तविकता है तो क्षेत्रों में हो रहे कार्यों में अनियमितताएं क्यों हो रही हैं? ठेकेदारों द्वारा मनमाने ढंग से काम कैसे किया जा सकता है? अब कार्यावधि में कार्यालय की खाली पड़ी कुर्सियों की वास्तविकता क्या है यह फिलहाल जांच का विषय है। अब देखना यह है कि जनपद के उच्चाधिकारियों द्वारा इस मामले में कोई तर्क प्रस्तुत किया जाता है या मामले की जांच कराकर उचित कार्यवाही की जाएगी?










