युवा दिवस के अवसर पर गायत्री परिवार ने जारी की वार्षिक कार्ययोजना
संवाददाता

रायबरेली।
अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा युवा दिवस, स्वामी विवेकानंद जयंती के अवसर पर सामूहिक वार्षिक कार्ययोजना जारी की गई।

नगर के सिविल लाइन स्थित गायत्री शक्तिपीठ द्वारा माता गायत्री, स्वामी विवेकानंद, युग दृष्टा प. श्रीराम शर्मा आचार्य एवं माता भगवती देवी के चित्र पर पुष्प अर्पित करते हुए दीप प्रज्वलन एवं गायत्री मंत्र के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया तत्पश्चात पत्रकार वार्ता के माध्यम से अपनी सामूहिक वार्षिक कार्ययोजना की जानकारी साझा की गई। गायत्री ट्रस्ट की प्रबंध ट्रस्टी मीना सिंह ने कहा कि वर्ष २०२६ गायत्री परिवार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक वर्ष है क्योंकि यह वर्ष हमारी वन्दनीया माता भगवती देवी शर्मा जी की जन्म शताब्दी और सौ वर्ष पूर्व पूज्य गुरुदेव द्वारा प्रज्ज्वलित अखंड दीप के शताब्दी वर्ष तथा पूज्य गुरुदेव पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी की तपश्चर्या एवं साधना के १०० वर्ष को समर्पित है। इन तीनों शताब्दियों को हम स्मृति नहीं, बल्कि समाज-परिवर्तन के संकल्प के रूप में मना रहे हैं।
उन्होंने बताया कि इसी भावभूमि पर वर्ष २०२६ की सामूहिक वार्षिक कार्ययोजना तैयार की गई है, जिसमें युवा जागरण, भारतीय संस्कारों का पुनर्जागरण, नारी सशक्तीकरण पर्यावरण संरक्षण, व्यसन मुक्ति, आत्मनिर्भरता और राष्ट्रचेतना से जुड़े कार्यक्रम सम्मिलित हैं।
इस कार्ययोजना में मुख्य रूप से १२ जनवरी युवा दिवस, २३ जनवरी से ०२ मार्च सामूहिक साधना अभियान, २४०० नये देव परिवार बनाना, १००० समर्थ सशक्त नारियों का महिला मण्डल बनाना, राष्ट्र जागरण हेतु सभी पर्वो पर सामूहिक अखंड महामृत्युंजय एवं गायत्री मंत्र जप होंगे तथा नमामि गंगे के अंतर्गत जलस्रोत स्वच्छता, देशभर में एक साथ गृहे गृहे यज्ञ, व्यसन मुक्त भारत, पॉलिथीन मुक्त भारत, वृक्षारोपण अभियान, १००८ पारिवारिक सम्मेलन, २५१ दम्पति सम्मेलन, कन्या किशोर कौशल शिविर, शिक्षक गरिमा शिविर, आओ गढ़े संस्कारवान पीढ़ी के अंतर्गत १०८ गर्भवती माताओं का पुंसवन संस्कार तथा स्वावलंबन मेला जैसे कार्यक्रम पूरे वर्ष चलाए जाएंगे। इसके साथ ही अखिल विश्व गायत्री परिवार के तत्वाधान में नवम्बर २०२६ में हरिद्वार में १००८ कुण्डीय गायत्री महायज्ञ का आयोजन किया जाएगा।
इस अवसर पर गायत्री शक्तिपीठ द्वारा युग दृष्टा, युग मनीषी के विचार-क्रांति, राष्ट्र-निर्माण और मनुष्य मे देवत्व का उदय तथा धरती पर स्वर्ग के अवतरण की संकल्पना को जन जन तक पहुंचाने हेतु सहयोग हेतु आवाह्न किया।










